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भारतीय मनोविश्लेषक और लेखक सुधीर कक्कड़ का 85 साल की उम्र में निधन

नई दिल्ली। सुधीर कक्कड़ का 85 साल की उम्र में निधन हो गया. वह सिर्फ एक मनोविश्लेषक ही नहीं थे, इंजीनियर और अर्थशास्त्री भी थे. उन्होंने पहले ग्रेजुएशन और बाद में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की. वह भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भारतीय प्रबंधन संस्थान और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, साथ ही कई विदेशी कॉलेजों में पढ़ा चुके हैं. द इनर वर्ल्ड (1978) कक्कड़ के पहले प्रमुख कार्यों में से एक है. शैमैन्स, मिस्टिक्स एंड डॉक्टर्स (1990) और द इंडियंस: पोर्ट्रेट ऑफ ए पीपल जैसी किताबें भी उनकी मेशहूर लेखनी में शुमार की जाती हैं. उन्हें भारतीय समाज की व्याख्या करने में रुचि थी.कक्कड़ को धर्म और राजनीति के साथ राजनीतिक संबंधों में इंटरेस्ट था.

कक्कड़ सांस्कृतिक मनोविज्ञान और धर्म के मनोविज्ञान के क्षेत्र में विद्वान थे. वह हार्वर्ड विश्वविद्यालय में लेक्चरर, हार्वर्ड में विश्व धर्म अध्ययन केंद्र में वरिष्ठ फेलो और शिकागो, मैकगिल, मेलबर्न, हवाई और वियना विश्वविद्यालयों में विजिटिंग प्रोफेसर रहे.

ऑर्डर ऑफ मेरिट से सम्मानित
2012 में, कक्कड़ को राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक क्षेत्रों में विशेष उपलब्धियों के लिए जर्मनी द्वारा देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ऑर्डर ऑफ मेरिट से सम्मानित किया गया था. जर्मन साप्ताहिक डाई ज़िट ने काकर को “21वीं सदी के 21 महत्वपूर्ण विचारकों” में से एक बताया था.

 

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