OSM बवाल के बाद शिक्षकों की अपील, छात्रों के लिए हो मैनुअल री-इवैल्यूएशन

पूजा भट्ट

CBSE ने 12वीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। छात्र 6 जून तक इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि बोर्ड ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि री-इवैल्यूएशन के नतीजे कब जारी किए जाएंगे। इस बीच कॉपियों की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) को लेकर उठे विवाद के बाद री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया भी चर्चा में आ गई है।

इस साल CBSE ने 12वीं की कॉपियों की जांच डिजिटल तरीके से OSM सिस्टम के जरिए कराई थी। परिणाम घोषित होने के बाद कई छात्रों और अभिभावकों ने मार्किंग को लेकर सवाल उठाए। कुछ छात्रों का कहना था कि उन्हें उम्मीद से कम अंक मिले हैं, जबकि कई ने स्कैन की गई कॉपियों की गुणवत्ता और मूल्यांकन प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई। इसी वजह से बड़ी संख्या में छात्र अब अपने अंकों की दोबारा जांच कराना चाहते हैं।

मामले को देखते हुए राजकीय विद्यालय शिक्षक संघ (GSTA) ने CBSE को सुझाव दिया है कि जरूरत पड़ने पर री-इवैल्यूएशन पारंपरिक यानी मैनुअल तरीके से कराया जाए। संघ का मानना है कि तकनीकी समस्याओं के कारण कई छात्रों की शंकाएं पूरी तरह दूर नहीं हो पा रही हैं। ऐसे में केवल डिजिटल प्रक्रिया पर निर्भर रहने से छात्रों और अभिभावकों का भरोसा पूरी तरह नहीं बन पाएगा।
GSTA के महासचिव अजय वीर यादव ने कहा कि 12वीं कक्षा का परिणाम छात्रों के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। कॉलेजों में दाखिले, प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर के कई अवसरों पर एक-एक अंक का असर पड़ता है। इसलिए यह जरूरी है कि मूल्यांकन प्रक्रिया इतनी पारदर्शी और भरोसेमंद हो कि किसी भी छात्र को अपने परिणाम को लेकर संदेह न रहे।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि बोर्ड मैनुअल री-इवैल्यूएशन का फैसला करता है तो शिक्षक इस काम में पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हैं। उनके मुताबिक, OSM व्यवस्था को लागू करने से पहले विभिन्न पक्षों की ओर से जो सुझाव दिए गए थे, उन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। अब सामने आ रही समस्याएं उसी का परिणाम दिखाई देती हैं।

OSM को लेकर विवाद तब और बढ़ गया जब कई छात्रों ने अपनी स्कैन कॉपियों में गड़बड़ियों की शिकायत की। कुछ ने कॉपियां धुंधली होने की बात कही, तो कुछ ने मूल्यांकन में त्रुटियों का आरोप लगाया। इन शिकायतों के बाद पूरे देश में इस व्यवस्था को लेकर बहस शुरू हो गई। बढ़ते विवाद को देखते हुए सरकार ने OSM से जुड़े टेंडर और पूरी प्रक्रिया की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति का गठन किया है, जो मामले की पड़ताल करेगी।

अब छात्रों और अभिभावकों की नजर री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया और जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी है। उम्मीद की जा रही है कि बोर्ड आगे ऐसे कदम उठाएगा जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर पैदा हुए सवालों का समाधान हो सके और छात्रों का भरोसा फिर से मजबूत किया जा सके।

Back To Top