भारत-नेपाल कनेक्टिविटी को मिलेगी नई रफ्तार: अप्रैल 2027 से दौड़ेंगे वाहन, 75% पूरा हुआ बनबसा फोरलेन हाईवे

पूजा भट्ट

भारत और नेपाल के बीच सड़क संपर्क को नई मजबूती देने वाली एक अहम परियोजना तेजी से अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। उत्तराखंड के बनबसा से नेपाल सीमा तक बन रहा अत्याधुनिक फोरलेन हाईवे लगभग 75 प्रतिशत पूरा हो चुका है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अनुसार, इस हाईवे पर अप्रैल 2027 से वाहनों का आवागमन शुरू होने की संभावना है। इसके चालू होने के बाद दोनों देशों के बीच यात्रा, व्यापार और पर्यटन को नई गति मिलेगी।

यह परियोजना उत्तराखंड के बनबसा स्थित जगबुड़ा पुल से नेपाल सीमा तक करीब 3.65 किलोमीटर लंबाई में विकसित की जा रही है। यह उत्तराखंड से नेपाल को जोड़ने वाला पहला फोरलेन सड़क मार्ग होगा, जो आधुनिक सुविधाओं और बेहतर यातायात व्यवस्था से लैस रहेगा। परियोजना प्रबंधक अमित शर्मा के मुताबिक, निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है और अप्रैल 2027 तक यह मार्ग पूरी तरह संचालित हो जाएगा।

इस फोरलेन हाईवे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह शारदा नदी पर बने पुल के जरिए नेपाल के दोधारा-चांदनी क्षेत्र में विकसित किए जा रहे ड्राई पोर्ट (सूखा बंदरगाह) से सीधे जुड़ जाएगा। नेपाल की ओर भी सड़क निर्माण का कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। माना जा रहा है कि इस कनेक्टिविटी से दोनों देशों के बीच माल परिवहन अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक होगा।
भारतमाला परियोजना के तहत विकसित हो रहे इस हाईवे में आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। परियोजना में एक मेजर ब्रिज, एक माइनर ब्रिज, एक रेलवे ओवरब्रिज (ROB), एक फ्लाईओवर, छह कलवर्ट, एक अंडरपास और एक वायाडक्ट पुल का निर्माण शामिल है। इसके अलावा, आसपास के गांवों को बाढ़ से सुरक्षित रखने के लिए लगभग 1,870 मीटर लंबा एलिवेटेड सेक्शन भी तैयार किया जा रहा है।

यह परियोजना केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के आर्थिक विकास की दिशा में भी बड़ा कदम मानी जा रही है। नेपाल के दोधारा-चांदनी में भारत के सहयोग से बन रहे ड्राई पोर्ट के शुरू होने के बाद सीमा पार व्यापार को नया विस्तार मिलेगा। इससे दोनों देशों के लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलेगा और पर्यटन गतिविधियों में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।निर्माण के दौरान पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण का भी विशेष ध्यान रखा गया है। यह क्षेत्र हाथी कॉरिडोर के अंतर्गत आता है, इसलिए वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए लगभग 750 मीटर लंबा विशेष वन्यजीव कॉरिडोर बनाया जा रहा है। इसके साथ ही शारदा नहर पर 55 मीटर लंबे गार्डर पुल का निर्माण भी तेजी से जारी है।

हाईवे के पूरा होने के बाद अंतरराष्ट्रीय सीमा पर इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP) को भी आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। यहां सुरक्षा, आव्रजन (इमिग्रेशन), सीमा शुल्क और व्यापार प्रबंधन के लिए विभिन्न एजेंसियां अपनी-अपनी इकाइयां स्थापित करेंगी। इनमें सशस्त्र सीमा बल (SSB), ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन, सीमा शुल्क विभाग, लैंड पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया और उत्तराखंड पुलिस की चौकियां शामिल होंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फोरलेन हाईवे भारत और नेपाल के बीच दशकों पुराने सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती देगा। बेहतर सड़क संपर्क से यात्रा का समय कम होगा, सीमा पार व्यापार आसान बनेगा और दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा पहले से कहीं अधिक व्यापक हो सकेगा। अप्रैल 2027 में इस परियोजना के शुरू होने के साथ उत्तराखंड और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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