लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। फर्जी सीबीआई अधिकारी बनकर एक महिला से 47 लाख रुपये की ठगी करने वाले तीन शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों ने एक डर और भ्रम का जाल बुनकर पीड़िता को पूरी तरह मानसिक दबाव में लेते हुए यह ठगी की।
रीता भसीन को बनाया था शिकार
18 जुलाई को रीता भसीन नामक महिला ने साइबर क्राइम थाने में मामला दर्ज कराया था कि कुछ लोगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर लिया और 47 लाख रुपये ऐंठ लिए। पीड़िता को फोन पर बताया गया कि उनके आधार और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों में हुआ है और उनके खिलाफ मुंबई के अंधेरी ईस्ट थाने में एफआईआर दर्ज है।
इसके बाद वीडियो कॉल पर आरोपियों ने पुलिस वर्दी पहनकर उन्हें धमकाया और फर्जी अरेस्ट वारंट भेजा। महिला को डराकर लगातार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर रखा गया और घर से बाहर न निकलने की धमकी दी गई।
तीन आरोपी गिरफ्तार, थाना जैसा था सेटअप
इंस्पेक्टर बृजेश कुमार यादव के नेतृत्व में की गई जांच के बाद सुल्तानपुर निवासी अनुराग तिवारी, रायबरेली के प्रखर प्रताप सिंह, और अंबेडकरनगर के अनुपम सिंह को गिरफ्तार किया गया। ये आरोपी लोगों को वीडियो कॉल पर फंसाने के लिए थाने जैसा सेटअप और पुलिस वर्दी का इस्तेमाल करते थे।
इनके पास से:
-
2 मोबाइल फोन
-
14 डेबिट कार्ड
-
7 चेकबुक
बरामद की गईं। -
डिजिटल अरेस्ट का ताना-बाना
आरोपी खुद को सरकारी अधिकारी बताते हुए पीड़ित को कहते थे कि उन्हें डिजिटल रूप से गिरफ्तार किया गया है। इसके बाद उन्हें स्काइप या अन्य वीडियो कॉलिंग माध्यमों पर नजरबंद रखते थे। डर का माहौल बना कर, पीड़ित को किसी से बात न करने देने की रणनीति के तहत, वे धोखे से रकम ट्रांसफर करवा लेते थे।
पांच खाते फ्रीज, 10.5 लाख की बरामदगी
पुलिस जांच में आरोपियों के पांच बैंक खातों में जमा 10.5 लाख रुपये फ्रीज किए गए हैं। ये राशि पीड़िता को वापस दिलाने की प्रक्रिया जारी है।


