प्रतिष्ठा, परंपरा और प्रथा… ये शब्द अब सिर्फ़ पुरानी फिल्मों के डायलॉग बनकर रह गए हैं। समीक्षा सिंह आज का युवा तेज़ी से बदलती दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है, लेकिन इसी दौड़ में कहीं न कहीं हमारी भारतीय संस्कृति और सभ्यता पीछे छूटती जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यही […]

