सिर्फ मोटापा नहीं, कमजोर मांसपेशियां भी बढ़ाती हैं डायबिटीज का खतरा! नए अध्ययन में बड़ा खुलासा

14 साल तक 4.79 लाख लोगों पर हुई रिसर्च, शरीर में ज्यादा फैट और कमजोर मांसपेशियों वाले लोगों में टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम सबसे अधिक

क्या डायबिटीज का खतरा सिर्फ बढ़ते वजन से जुड़ा है? एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने इस धारणा को चुनौती दी है। शोध के अनुसार, केवल शरीर में अतिरिक्त चर्बी (फैट) ही नहीं, बल्कि कमजोर मांसपेशियां (Poor Muscle Health) भी टाइप-2 डायबिटीज का खतरा काफी बढ़ा सकती हैं।

अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों के शरीर में अधिक वसा (Obesity) के साथ-साथ मांसपेशियों की ताकत और कार्यक्षमता भी कम थी, उनमें स्वस्थ शरीर संरचना वाले लोगों की तुलना में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा साढ़े तीन गुना से अधिक था।

यह शोध प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल Diabetes Care में प्रकाशित हुआ है।

क्या है सार्कोपेनिक ओबेसिटी?

शोध में जिस स्थिति का सबसे ज्यादा उल्लेख किया गया, उसे सार्कोपेनिक ओबेसिटी (Sarcopenic Obesity) कहा जाता है। इसका मतलब है कि व्यक्ति के शरीर में फैट अधिक हो और साथ ही मांसपेशियों का द्रव्यमान, ताकत या कार्यक्षमता कम हो।

शोधकर्ताओं के मुताबिक—

  • सार्कोपेनिक ओबेसिटी वाले लोगों में सिर्फ मोटापे वाले लोगों की तुलना में डायबिटीज का खतरा 19% अधिक पाया गया।
  • वहीं, केवल मांसपेशियों की कमजोरी (सार्कोपेनिया) वाले लोगों की तुलना में यह जोखिम 91% अधिक था।

14 साल तक चला अध्ययन

ऑस्ट्रेलिया की कर्टिन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यूके बायोबैंक के 4,79,607 ऐसे लोगों के स्वास्थ्य डेटा का विश्लेषण किया, जिन्हें अध्ययन की शुरुआत में डायबिटीज नहीं थी।

करीब 14 वर्षों तक चले इस अध्ययन के दौरान लगभग 32,950 प्रतिभागियों को टाइप-2 डायबिटीज हो गई।

हर 100 में 15 लोग हुए डायबिटीज के शिकार

अध्ययन के अनुसार—

  • सार्कोपेनिक ओबेसिटी वाले लगभग 15% लोगों को 10 वर्षों के भीतर टाइप-2 डायबिटीज हुई।
  • केवल मोटापे वाले लोगों में यह आंकड़ा करीब 11% रहा।
  • जबकि जिन लोगों में न मोटापा था और न मांसपेशियों की कमजोरी, उनमें यह दर केवल 3% रही।

शोध में यह संबंध विशेष रूप से महिलाओं और 60 वर्ष से कम उम्र के लोगों में अधिक मजबूत पाया गया।

विशेषज्ञों ने क्या कहा?

अध्ययन के मुख्य लेखक झोंगयांग गुआन के अनुसार, यह शोध इस धारणा को बदलता है कि डायबिटीज का जोखिम केवल वजन पर निर्भर करता है। उनका कहना है कि शरीर की मांसपेशियों की सेहत भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

वहीं, अध्ययन के वरिष्ठ लेखक प्रोफेसर मारियो सिएर्वो ने कहा कि डायबिटीज से बचाव के लिए केवल वजन घटाने पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। शरीर में फैट कम करने के साथ-साथ मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखना भी जरूरी है।

डायबिटीज से बचाव के लिए क्या करें?

विशेषज्ञों के अनुसार टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम करने के लिए—

  • नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और शारीरिक गतिविधि करें।
  • पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन युक्त संतुलित आहार लें।
  • शरीर में अतिरिक्त चर्बी नियंत्रित रखें।
  • नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं।
  • यदि परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच कराएं।

नोट: यह अध्ययन दो कारकों—शरीर में फैट और मांसपेशियों की सेहत—के बीच संबंध दिखाता है। यह यह साबित नहीं करता कि मांसपेशियों की कमजोरी अकेले डायबिटीज का कारण बनती है, लेकिन यह जोखिम का एक महत्वपूर्ण संकेतक हो सकती है।

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