बलरामपुर (उत्तर प्रदेश): भारत-नेपाल सीमा से सटे बलरामपुर जिले में सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 9वीं वाहिनी और वनकटवा वन विभाग की संयुक्त टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए चंदन की लकड़ी की तस्करी के रैकेट का पर्दाफाश किया है। टीम ने चौधरीडीह गांव के पास से तीन शातिर तस्करों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से आठ बोटा (टुकड़े) चंदन की कीमती लकड़ी, तस्करी में इस्तेमाल होने वाली एक लाल रंग की कार और एक मोटरसाइकिल को सीज कर दिया गया है।
वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) शत्रोहन लाल ने बताया कि एसएसबी के गंदेलानाका पोस्ट को पुख्ता सूचना मिली थी कि अंतरराष्ट्रीय सीमा स्तंभ संख्या 614(63) से करीब 10 किलोमीटर भीतर भारतीय क्षेत्र में एक लाल रंग की कार से चंदन की लकड़ी की अवैध तस्करी होने वाली है। सूचना मिलते ही एसएसबी की क्यूआरटी (QRT) और वन विभाग की संयुक्त टीम ने चौधरीडीह गांव में जाल बिछाया।
सोमवार की रात सिरसिया की तरफ से एक लाल कार आती दिखी, जिसके आगे एक मोटरसाइकिल पर सवार दो युवक रास्ता साफ होने का इशारा (पायलटिंग) करते हुए चल रहे थे। टीम ने जब घेराबंदी की, तो आरोपी गाड़ियां छोड़कर भागने लगे, जिन्हें दौड़ाकर दबोच लिया गया।
कार की तलाशी लेने पर उसके अंदर से चंदन की लकड़ी के आठ बड़े बोटे बरामद हुए। परिवहन या कटान से जुड़े वैध दस्तावेज न होने पर तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान सुशील पांडेय (निवासी नेवादा तारपत, कानपुर), सत्येंद्र सिंह (निवासी नदीह खुर्द, कानपुर) और महेश (निवासी मुबारकपुर टीला, कन्नौज) के रूप में हुई है। वन विभाग जब्त की गई लकड़ी की पैमाइश और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी कीमत का आकलन करने में जुटा है।
सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग का वनकटवा रेंज कीमती लकड़ियों जैसे खैर, सागौन और साखू की अवैध कटान के लिए लंबे समय से संवेदनशील रहा है। पूर्व में इस रेंज के रेंजर राजेश पाठक को भी खैर की लकड़ी की तस्करी के आरोप में जेल भेजा जा चुका है। 6 महीने पहले भी पुलिस ने एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया था, जिसमें कुछ सफेदपोशों के करीबियों के नाम सामने आए थे। पुलिस अब इस मामले में भी तस्करों के स्थानीय नेटवर्क और लकड़ी ग्रामीण क्षेत्र की है या वन्य क्षेत्र की, इसकी गहनता से जांच कर रही है।

