आयुषी
हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर स्थित नगरासू गुरुद्वारे में शनिवार को अचानक तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई, जब पिछले तीन दिनों से गुरुद्वारे में रह रहे सात निहंग छत पर चढ़ गए। घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और पुलिस, आईटीबीपी सहित अन्य सुरक्षा एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।जानकारी के अनुसार सातों निहंग तीन दिन पहले नगरासू पहुंचे थे। इस दौरान वे श्रद्धालुओं और सेवादारों की तरह गुरुद्वारे में रह रहे थे तथा सेवा कार्यों में भी हिस्सा ले रहे थे।
गुरुद्वारा प्रबंधन के साथ उनकी कई दौर की बातचीत भी हुई थी। बताया जा रहा है कि वे अपने साथ बड़ी संख्या में लोगों को गुरुद्वारे में ठहराने की मांग कर रहे थे। मांग पूरी नहीं होने पर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई।शनिवार सुबह तक गुरुद्वारे में सभी गतिविधियां सामान्य रूप से संचालित हो रही थीं, लेकिन शाम के समय सातों निहंग अचानक गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए।
इसके बाद पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया और प्रशासन को अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने पड़े।गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रबंधक बाबा बेहंत सिंह ने बताया कि निहंग अपने साथियों की रिहाई की मांग पर अड़े हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विवाद के दौरान दो लोगों को बंधक बनाया गया था। इनमें से एक व्यक्ति को शनिवार देर रात छोड़ दिया गया, जबकि एक सेवादार अभी भी उनके कब्जे में होने की बात कही जा रही है।उन्होंने बताया कि प्रशासन और गुरुद्वारा प्रबंधन की ओर से कई दौर की वार्ता की गई, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। घटना का असर गुरुद्वारे की नियमित व्यवस्थाओं पर भी पड़ा है। सामान्य दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां लंगर प्रसाद ग्रहण करते हैं, लेकिन तनाव के कारण श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित हुई है और तैयार भोजन का भी उपयोग नहीं हो सका।मामले को और गंभीर बनाते हुए गुरुद्वारे की छत पर ईंट-पत्थर तथा नुकीली वस्तुएं जमा होने की जानकारी सामने आई है।
कोतवाली प्रभारी निरीक्षक सुरेश बलूनी ने भी इसकी पुष्टि की है। सुरक्षा एजेंसियां किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी चिंता का माहौल है। गुरुद्वारे के समीप रहने वाली रजनी देवी ने बताया कि वर्ष 2007-08 में भी यहां एक विवाद हुआ था, लेकिन तब हालात इतने तनावपूर्ण नहीं बने थे। क्षेत्र पंचायत सदस्य सतीश राणा ने कहा कि नगरासू में इस प्रकार की घटना पहली बार देखने को मिली है, जिससे स्थानीय लोगों में भय और चिंता बढ़ गई है।सुरक्षा व्यवस्था के तहत चमोली और अल्मोड़ा जनपद की सीमा से जुड़े पाडुंवाखाल, नागचूलाखाल और माईथान क्षेत्रों में चौकसी बढ़ा दी गई है। कोतवाल मनोज सिरौला ने बताया कि एसडीएम अबरार अहमद और तहसीलदार हरीशचंद्र पांडे के नेतृत्व में प्रशासनिक टीमें लगातार हालात की निगरानी कर रही हैं।
क्षेत्र में आईटीबीपी की एक प्लाटून के साथ पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई है।फिलहाल प्रशासन शांतिपूर्ण समाधान निकालने के प्रयास में जुटा है। वहीं स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि जल्द ही स्थिति सामान्य होगी और गुरुद्वारे की नियमित गतिविधियां फिर से सुचारू रूप से संचालित हो सकेंगी।

