आयुषी
दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला बुधवार को उस समय दहल उठा, जब महज एक मिनट के अंतराल में 7.1 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंपों ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। राजधानी काराकास समेत कई शहरों में इमारतें और मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गए, जिससे चारों ओर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस भीषण आपदा में अब तक 162 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 971 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। हालांकि, मलबे में अब भी कई लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है, जिसके चलते मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ सकती है।
भूकंप के सबसे ज्यादा असर वाले इलाकों में बचावकर्मी लगातार मलबा हटाने और जीवित लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं। स्थानीय अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई बहुमंजिला इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जबकि हजारों लोग घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हुए हैं।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी है। राष्ट्र के नाम संबोधन में उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार राहत और बचाव कार्यों में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।वहीं, गृह मंत्री डियोसडाडो कैबेलो ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों, आपदा प्रबंधन टीमों और नागरिक सहायता संसाधनों को पूरी क्षमता के साथ मैदान में उतार दिया गया है।
इस बीच, अमेरिका ने भी वेनेजुएला को सहायता देने की पेशकश की है। अमेरिकी डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट क्रिस्टोफर लैंडौ ने कहा कि अमेरिकी अधिकारी वेनेजुएला के संपर्क में हैं और राहत सहायता जुटाने का काम कर रहे हैं। काराकास स्थित अमेरिकी दूतावास ने भी नागरिकों से क्षतिग्रस्त इलाकों से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।मौसम और आपदा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भूकंप के बाद की स्थिति और गंभीर हो सकती है। फिलहाल पूरे देश की निगाहें राहत और बचाव अभियानों पर टिकी हैं, जबकि हजारों परिवार अपने प्रियजनों के सुरक्षित मिलने की उम्मीद में इंतजार कर रहे हैं।

