Category: ब्लॉग

कंटेंट क्रिएशन: आज़ादी या एक नया बंधन?

वंशिका जब से मोबाइल और इंटरनेट हर हाथ में पहुँचा है, तब से ऑनलाइन पैसे कमाने के नए-नए रास्ते खुल गए हैं। आज हर कोई सोशल मीडिया पर सक्रिय है — कोई वीडियो बना रहा है, कोई रील्स डाल रहा है, कोई व्लॉग कर रहा है, तो कोई इंस्टाग्राम पर मोटिवेशनल बातें शेयर कर रहा […]

डिजिटल युग में युवाओं की ट्रेडिंग की ओर बढ़ती दिलचस्पी: कमाई का मौका या जोखिम भरा सपना?

प्रियांश कुकरेजा आजकल ट्रेडिंग यानी शेयर बाजार में बहुत तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। खासकर हमारे देश भारत में कई युवा लोग इसमें जुड़ रहे हैं। इसका एक बड़ा कारण है कि अब इंटरनेट और मोबाइल ऐप्स की मदद से कोई भी आसानी से ट्रेडिंग कर सकता है। जैसे कि, Angel One, Paytm Money, […]

सोशल मीडिया पर सब कुछ सच नहीं होता, और हर सलाह हर किसी के लिए नहीं होती।

समीक्षा सिंह  डिजिटल दुनिया में जानकारी बिजली की तरह फैलती है। आज के दौर में हम सभी किसी न किसी रूप में डिजिटल मीडिया का हिस्सा है। WhatsApp, Facebook, Instagram, Twitter/X, YouTube, Telegram या कोई और प्लेटफार्म । इन सभी माध्यमों से विडियो , मेसेज , खबरें बहुत तेज़ी से वायरल होती है एक मेसेज, […]

देहरादून में क्लब कल्चर का बढ़ना: अच्छा है या बुरा?

प्रियांश कुकरेजा  देहरादून में क्लब कल्चर तेजी से बढ़ रहा है और यह आज के युवाओं के लिए मनोरंजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। आजकल के युवा पढ़ाई और काम के कारण बहुत तनाव में रहते हैं, ऐसे में क्लबों का होना उनके लिए एक अच्छा विकल्प साबित होता है जहाँ वे अपने […]

विकास की रफ़्तार तेज़ है, लेकिन ज़िंदगी अब भी नाज़ुक है

वंशिका  सफ़र हमेशा खास होता है — कभी खुशी से भरा, तो कभी बहुत ही दर्दनाक। ज़िंदगी कब क्या मोड़ ले ले, इसका कोई अंदाज़ा नहीं होता। अहमदाबाद प्लेन हादसे ने हर किसी को अंदर तक झकझोर दिया है। जो लोग नए सपनों के साथ एक नई शुरुआत करने जा रहे थे, उन्हें क्या पता […]

डिजिटल लत का नया चेहरा: जब हर स्क्रॉल में छिपा हो एक जाल

मोनिका इंटरएक्टिविटी यानी परस्पर क्रिया किसी भी सूचना प्रणाली में हमें जानकारी तक पहुंचने और उसका इस्तेमाल करने में कुछ हद तक नियंत्रण देती है। सुनने में यह हमारे लिए फायदेमंद लगता है — हमें विकल्प मिलते हैं, जैसे किसी चौराहे पर खड़े होकर रास्ता चुनना। लेकिन डिजिटल दुनिया में ये रास्ते पहले से तय […]

भ्रमित जीवन: सपनों की दुनिया या हकीकत से दूर जाना?

कभी-कभी हमारी सोच हमें खुश रखती है, लेकिन जब हम हकीकत से दूर हो जाएं, तो रिश्ते और तरक्की प्रभावित होती है प्रियांश कुकरेजा कभी-कभी हम ऐसी दुनिया में जीने लगते हैं जो हमारे मन ने बनाई होती है — एक ऐसी दुनिया जहां सब कुछ हमारे हिसाब से होता है, जहां हम खुद को […]

देहरादून,को भारत की शिक्षा राजधानी क्यों माना जाता है?

प्रियांश कुकरेजा  जब भी भारत में पढ़ाई के लिए सबसे अच्छी जगह की बात होती है, तो देहरादून का नाम सबसे पहले लिया जाता है। देहरादून को भारत की शिक्षा राजधानी कहा जाता है क्योंकि यहां बहुत पुराने, भरोसेमंद और शानदार स्कूल और कॉलेज हैं, जहां से पढ़कर कई बड़े और मशहूर लोग निकले हैं। […]

बच्चा तो हमारी बात सुनता ही नहीं है”

जानिए बच्चे कैसे सोचते हैं, क्या सीखते हैं, और पैरेंट्स के लिए कौन-सी बातें ज़रूरी हैं समझना समीक्षा सिंह  अक्सर मम्मी-पापा को लगता है कि “बच्चा तो हमारी बात सुनता ही नहीं है”, या “हम जो कहते हैं, उसका उस पर कोई असर नहीं होता”। लेकिन ये बात समझना ज़रूरी है कि बच्चों की नींव […]

देहरादून की छुपी हुई जगहें: भीड़ से दूर, दिल के करीब

एक स्थानीय की नज़र से देहरादून की वो अनदेखी जगहें, जहाँ सुकून, हरियाली और सच्ची खूबसूरती मिलती है। प्रियांश कुकरेजा  “देहरादून, उत्तराखंड की राजधानी, एक ऐसा शहर है जो अपनी ठंडी हवा, हरे-भरे पेड़ों, खूबसूरत पहाड़ियों, और शांति से बहते झरनों के लिए जाना जाता है। यहाँ की वादियाँ इतनी सुंदर हैं कि हर घूमने […]

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