नसरपुर में मासूम से दरिंदगी और हत्या के दोषी भीमराव कांबले को फांसी की सजा

पुणे: महाराष्ट्र के नसरपुर में साढ़े तीन साल की मासूम बच्ची के साथ बलात्कार और उसकी बेरहमी से हत्या करने वाले 65 वर्षीय दोषी भीमराव कांबले को पुणे की स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने मौत की सजा (फांसी) सुनाई है। पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत चले इस बेहद संवेदनशील मामले में अदालत ने महज 55 दिनों के भीतर अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

यह मामला महाराष्ट्र के कानूनी इतिहास में सबसे तेजी से पूरे हुए मुकदमों में से एक के तौर पर दर्ज हो गया है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई, 1,200 पन्नों की पुख्ता चार्जशीट और स्पेशल जज एस.आर. सालुंखे के सामने रोजाना हुई इन-कैमरा सुनवाई के चलते दोषी को अंजाम तक पहुंचाया जा सका।

स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अजय मिसर ने अदालत में दलील दी थी कि अपराध की क्रूरता सुप्रीम कोर्ट के ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (दुर्लभ से दुर्लभतम) सिद्धांत के दायरे में आती है, इसलिए दोषी को सिर्फ और सिर्फ मौत की सजा मिलनी चाहिए। वहीं बचाव पक्ष ने दोषी की उम्र का हवाला देकर नरमी बरतने की गुहार लगाई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत ने व्यापक फोरेंसिक और हालात के अकाट्य सबूतों के आधार पर दोषी को फांसी की सजा मुकर्रर की।

नसरपुर न्याय यात्रा: घटना से फांसी तक की टाइमलाइन
वारदात और आरोपी की गिरफ्तारी
01 मई 2026
नसरापुर गांव में अपनी दादी के घर के बाहर खेल रही साढ़े तीन साल की बच्ची को बहला-फुसलाकर अगवा किया गया। एक गौशाला में ले जाकर उसके साथ दरिंदगी की गई और उसकी हत्या कर दी गई। ग्रामीणों ने सीसीटीवी (CCTV) फुटेज के आधार पर आरोपी भीमराव कांबले को पहचान कर पुलिस को सौंपा।

जनता का आक्रोश और SIT का गठन
02-03 मई 2026
घटना के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए और नवाले ब्रिज के पास हाईवे जाम किया गया। पुलिस सुरक्षा में अंतिम संस्कार हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।

फास्ट-ट्रैक का भरोसा
04-10 मई 2026
राजनीतिक नेताओं ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की। पिता ने न्याय मिलने तक निजता बनाए रखने की अपील की। राज्य सरकार ने मामले को फास्ट-ट्रैक कोर्ट में चलाने का भरोसा दिया।

15 दिनों में चार्जशीट दाखिल
16 मई 2026
पुलिस ने कड़ी मेहनत कर महज 15 दिनों के भीतर 1,200 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की, जिसमें पुख्ता फोरेंसिक और डीएनए (DNA) सबूत शामिल थे।

आरोप तय और रोजाना सुनवाई
28 मई 2026
अदालत ने पॉक्सो और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रावधानों के तहत आरोप तय किए और रोजाना इन-कैमरा सुनवाई की शुरुआत हुई।

अंतिम बहस पूरी
21 जून 2026
कुल 55 गवाहों के बयान और गवाही रिकॉर्ड करने के बाद दोनों पक्षों की अंतिम बहस पूरी हुई। अभियोजन पक्ष ने मौत की सजा की पुरजोर मांग की।

अदालत ने ठहराया दोषी
25 जून 2026
विशेष अदालत ने सबूतों की अटूट कड़ी के आधार पर भीमराव कांबले को अपहरण, बलात्कार और हत्या का दोषी करार दिया।

फांसी की सजा का ऐलान
29 जून 2026
स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने दोषी भीमराव कांबले को उसके घिनौने कृत्य के लिए मौत की सजा सुनाई।

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