आयुषी
उत्तराखंड में सौर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े निवेशकों, उद्यमियों और उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। राज्य विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सोलर प्रोजेक्ट्स से उत्पादित बिजली की दरों में कटौती के प्रस्ताव को खारिज करते हुए मौजूदा 4.10 रुपये प्रति यूनिट टैरिफ को बरकरार रखने का फैसला किया है। इससे राज्य में सौर ऊर्जा परियोजनाओं को स्थिरता मिलेगी और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।आयोग ने इससे पहले जारी ड्राफ्ट आदेश में सोलर टैरिफ को 4.10 रुपये से घटाकर 3.96 रुपये प्रति यूनिट करने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, उरेडा समेत विभिन्न हितधारकों ने पर्वतीय क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण की ऊंची लागत, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सोलर मॉड्यूल की कीमतों में अस्थिरता का हवाला देते हुए इस पर आपत्ति जताई। सुझावों पर विचार करने के बाद आयोग ने प्रस्तावित कटौती वापस ले ली।आयोग की पीठ, जिसमें अध्यक्ष एम.एल. प्रसाद, सदस्य (विधि) अनुराग शर्मा और सदस्य (तकनीकी) प्रभात किशोर डिमरी शामिल थे, ने कहा कि बाजार की मौजूदा परिस्थितियों और परियोजनाओं की व्यवहार्यता को ध्यान में रखते हुए दरों को यथावत रखना आवश्यक है।
रूफटॉप सोलर और छोटे ग्रिड इंटरएक्टिव प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए आयोग ने नेट मीटरिंग के तहत दो रुपये प्रति यूनिट की दर भी बरकरार रखी है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और बिजली बिल में भी राहत मिल सकेगी।आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि एमएसएमई नीति के तहत मिलने वाली सब्सिडी को सोलर टैरिफ से समायोजित नहीं किया जाएगा। इससे सौर ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाले युवा उद्यमियों और स्टार्टअप्स को सीधा लाभ मिलेगा।वहीं, कैनाल बैंक सोलर परियोजनाओं को सामान्य सोलर प्लांट्स के बराबर 4.10 रुपये प्रति यूनिट का टैरिफ दिया गया है। आयोग का कहना है कि अधिकांश परियोजनाएं नहरों पर नहीं बल्कि उनके निकट समतल भूमि पर विकसित की जा रही हैं।आयोग ने यूपीसीएल और यूजेवीएन लिमिटेड की धीमी टेंडर प्रक्रिया पर नाराजगी जताते हुए निर्देश दिया है कि नई दरों का लाभ केवल उन्हीं परियोजनाओं को मिलेगा जो आदेश जारी होने के 18 महीनों के भीतर शुरू हो जाएंगी।विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल टैरिफ निर्धारण तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तराखंड में हरित ऊर्जा निवेश को बढ़ावा देने और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

