भूकंप के बाद म्यांमार की मदद में भारत बना मजबूत पड़ोसी – राहत और बचाव कार्य में दिखाई तेजी
समीक्षा सिंह
देहरादून। जब प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखाती है, तब असली मानवता की परीक्षा होती है। हाल ही में म्यांमार में आए भयंकर भूकंप ने सैकड़ों लोगों की जिंदगी को झकझोर कर रख दिया। कई इमारतें ज़मीन मे मिल गयी, जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। ऐसे मुश्किल वक्त में भारत ने एक बार फिर साबित किया कि वह न सिर्फ एक पड़ोसी देश है, बल्कि एक सच्चा मित्र और मददगार साथी भी है।

भूकंप की सूचना मिलते ही भारत सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए NDRF की टीमें म्यांमार भेजीं। ये टीमें आधुनिक उपकरणों, स्निफर डॉग्स, जीवन रक्षक किट्स और मेडिकल सपोर्ट से पूरी तरह लैस थीं। भारत ने राहत सामग्री के साथ मेडिकल टीमें, मोबाइल हॉस्पिटल यूनिट्स, ज़रूरी दवाएं, फर्स्ट एड किट और साफ पेयजल की भी व्यवस्था की। भारतीय वायुसेना के C-17 ग्लोबमास्टर और C-130J सुपर हरक्यूलिस विमानों के ज़रिए टेंट, कंबल, रेडी-टू-ईट फूड और अन्य जरूरी संसाधन दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाए गए, जहाँ ज़मीनी रास्ते मुश्किल थे। यह मिशन केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की ‘पड़ोसी प्रथम नीति’ और ‘मानवता सर्वोपरि’ सोच का सशक्त उदाहरण है।
यह पहली बार नहीं है जब भारत ने किसी आपदा के समय आगे बढ़कर मदद का हाथ बढ़ाया हो। इससे पहले भी भारत ने कई बार अंतरराष्ट्रीय मानवीय राहत अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई है। 2015 में नेपाल में आए भीषण भूकंप के दौरान भारत ने “ऑपरेशन मित्र” चलाया था, जिसके तहत सैकड़ों लोगों की जान बचाई गई और ज़रूरी राहत सामग्री पहुंचाई गई। 2013 में उत्तराखंड में आई भयंकर बाढ़ के समय “ऑपरेशन राहत” के माध्यम से भारतीय सेना और वायुसेना ने हजारों फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकाला। इसके अलावा, 2023 में तुर्की और सीरिया में आए भूकंप के बाद भारत ने “ऑपरेशन दोस्त” चलाया और मेडिकल टीमों, राहत सामग्री तथा रेस्क्यू उपकरणों के साथ तत्काल मदद भेजी। ये सभी मिशन इस बात का सबूत हैं कि भारत न सिर्फ अपने नागरिकों, बल्कि पूरी दुनिया की मदद के लिए हमेशा तैयार रहता है – एक जिम्मेदार और संवेदनशील वैश्विक शक्ति के रूप में।

