आजकल की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में जाने अनजाने हम कितना कुछ ऐसा करते हैं जिसके बारे में अगर हम कुछ पल बैठकर सोचे, तो हम जान पाए कि इसके क्या दु़ष्प्रभाव हो सकते हैं। हम अपनी दिनचर्या में प्लास्टिक को इतना महत्त्व दें चुके है कि दूध से लेकर फल सब्जी तक बिना प्लास्टिक उपयोग किए हम तक नहीं पहुच रही, पर क्या आप जानते है कि प्लास्टिक में छुपे माइक्रोप्लास्टिक हमारे जीवन को कितना नुकसान पहुंचा रहे है।
माइक्रोप्लास्टिक क्या है ?
सूक्ष्म कण, जो दिखाई नहीं देते पर उसका असर बहुत गहरा होता हैं। माइक्रोप्लास्टिक एकदम छोटे छोटे प्लास्टिक के कण होते हैं, जो खाने में जाए तो खाने से आप बीमार हो सकते हैं। पानी में मिल जाए तो पांचन तंत्र पर असर, मस्तिष्क विकास पर और भी कई संभावित खतरे है जो पैदा हो जाते हैं। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है, हमारे शरीर के साथ साथ पर्यावरण को भी इन कणों से बेहद नुकसान पहुचता हैं। हम रोजाना प्लास्टिक के इन सूक्ष्म कणों से टकराते हैं बस वो इतने छोटे होते हैं की हम उन्हें देख नहीं पाते, कभी साँस लेते वक़्त हम उनकन्नो कणों को अपने अन्दर ले लेते हैं ।
मेकअप ब्यूटी प्रोडक्ट्स में पाए जाते है माइक्रोप्लास्टिक
आप सोचते होंगे छोटी सी तो जिंदगी है, उसमें भी एक नई जिम्मेदारी माइक्रोप्लास्टिक को कम करने की। जी हां, जो हमारे हाथ में हैं उसे हम कम कर सकते हैं। चलिए जानते है किस किस में पाए जाते है माइक्रोप्लास्टिक के कण .माइक्रोप्लास्टिक ऐसे बहुत छोटे प्लास्टिक के टुकड़े होते है, जो आकार में 5 मिलीमीटर से छोटे होते हैं। कुछ माइक्रोप्लास्टिक की बात करें तो वो चाय की थैलियों में, बोतलबंद पानी में, मेकअप के समानों में जैसे फेस स्क्रब, फेस वॉश, बॉडी वॉश, सिंथेटिक कपड़े जैसे नायलॉन, पॉलिएस्टर, ऐक्रेलिक जब धुलते हैं तो माइक्रोफाइबर निकलते हैं जो माइक्रोप्लास्टिक बन जाते हैं, समुद्री जीवों के अंदर पाए जाते हैं। आने वाले वक्त में अगर हमने अपनी आदतों को नहीं बदला माइक्रोप्लास्टिक की समस्या माइक्रो से मेक्रो रूप ले लेगी। जिस प्रकृति ने हमे जीवन दिया उसी की क्षति होना, मानव जीवन का सबसे बड़ा दुर्भाग्य बन जाएगा।
किन आदतों को अपनाकर आप पर्यावरण को बचाने में योगदान दे सकते है
अपनी आदतों में कम से कम कपड़े खरीदना, जरूरत के अनुसार खाना बनाना, प्लास्टिक की थैलियों में कम से कम समान लेना, थैले का उपयोग, बिजली का पर्याप्त मात्रा में इस्तमाल, सूखा गीला कचरा अलग अलग कर डालना, गीले कचरे से खाद्य बनाना, नेचुरल प्रोडक्ट की खरीदारी, पैदल चलना कुछ ऐसी आदतें है जिन्हें हम अपने दैनिक जीवन में शामिल कर सकते हैं। प्रकृति के साथ तालमेल बैठाना, मानव जीवन को जीने योग्य बनाता है, सभी के प्रयास से पृथ्वी में प्लास्टिक के उपयोग को सीमित किया जा सकता हैं।

