Karwa Chauth Special: भारत को त्योहारों का देश कहा जाता है, जहाँ अनेक पर्व बिना किसी भेदभाव के मनाए जाते हैं और हर कोई इन रंग-बिरंगे उत्सवों में डूब जाता है। ऐसा ही एक त्यौहार जिसे कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को मनाया जाता है करवा चौथ जो सुहागिन महिलाओं का सबसे प्रमुख व्रत है। इस दिन विवाहित महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्र देव के उदय होने तक निर्जला उपवास रखकर मनाती हैं।
महिलाओं को चिरसुहागिन का मिलता है आशीर्वाद
हिंदू परंपरा के अनुसार यह व्रत केवल पति-पत्नी के रिश्ते को ही मजबूत नहीं करता, बल्कि परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का मार्ग भी खोलता है। माना जाता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक रखने वाली महिलाओं को चिरसुहागिन यानी जो सदैव अपने पति के जीवित रहते हुए सौभाग्यवती बनी रहे का आशीर्वाद मिलता है।
करवा चौथ से जुड़ी प्रसिद्ध लोककथाएँ
करवा चौथ से जुड़ी कई लोककथाएँ प्रचलित हैं, जिनमें कुछ सबसे प्रसिद्ध हैं:
रानी वीरवती की कथा जिसमे सात भाइयों के छल के कारण समय से पहले व्रत तोड़ने पर उनके पति की मृत्यु हो गई, लेकिन देवी पार्वती की कृपा और सच्चे संकल्प से उन्हें दोबारा जीवन प्राप्त हुआ।
महाभारत कालीन कथा जिसमे द्रौपदी ने अर्जुन की कठिन तपस्या के समय भगवान कृष्ण के कहने पर करवा चौथ का व्रत रखा और पांडवों की परेशानियाँ दूर हो गई।
करवा और मगरमच्छ की कथा के अनुसार करवा नामक पत्नी ने अपने पति को मगरमच्छ से बचाने के लिए यमराज तक को श्राप देने का साहस दिखाया और पति को जीवनदान दिलाया।
सावित्री-सत्यवान की कथा को तो जगविख्यात है जिसमे सावित्री के अटूट व्रत और तपस्या के आगे यमराज को भी सत्यवान के प्राण वापस करने पड़े थे।
करवा चौथ का महत्त्व
यह पर्व पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और त्याग का प्रतीक है। ख़ासतौर से यहाँ उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में मनाया जाता है, जहाँ महिलाएँ अपने पति की सुरक्षा और लंबी उम्र के लिए यह व्रत रखती हैं। करवा चौथ का समय रबी की फसल की शुरुआत के साथ भी जुड़ा है। इस दिन महिलाएँ करवा (मिट्टी के बर्तन) में गेहूँ भरकर मंगलकामना करती हैं। प्राचीन समय में यह व्रत महिलाओं को एक-दूसरे से जुड़ने और ससुराल में अकेलेपन को दूर करने का अवसर भी देता था।
अब यह पर्व केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रहा। कई पति भी अपनी पत्नियों के साथ उपवास रखते हैं। यह बदलाव करवा चौथ को और भी खास बना देता है क्योंकि यह दोनों के प्रेम, सम्मान और साझेदारी का प्रतीक बन गया है। हर त्यौहार अपने आप में ख़ास है बस उसे बनाने के पीछे का कारण उसे और ख़ास बनाता है।


