फर्जी कंपनी बनाकर लोन लेने वाले दो आरोपियों की जमानत याचिका अदालत ने की खारिज

गाजियाबाद- गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाना क्षेत्र में निजी फाइनेंस कंपनी से धोखे से लाखों रुपये का ऋण लेने के मामले में गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों को अदालत से राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी जमानत याचिका को ठुकरा दिया है। यह फैसला प्रभारी सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार चतुर्थ की अदालत ने सुनाया।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस प्रकार की वित्तीय धोखाधड़ी बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों की साख को नुकसान पहुंचाती है, इसलिए ऐसे मामलों में नरमी नहीं बरती जा सकती। न्यायालय ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया गंभीर साक्ष्य उपलब्ध हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इरादा शुरू से ही धोखाधड़ी करने का था।

कैसे रची गई थी फर्जीवाड़े की साजिश

मामले की जानकारी के अनुसार, दिल्ली निवासी सुनील कुमार सोनी और रोहन सोनी ने वर्ष 2023 में ‘रोहन मेटल प्राइवेट लिमिटेड’ नाम से एक फर्जी कंपनी खड़ी कर दी। इसके बाद उन्होंने इस फर्जी कंपनी के नाम पर एक निजी फाइनेंस कंपनी से 31 लाख रुपये का लोन लेने के लिए आवेदन किया।

आवेदन के साथ दिए गए दस्तावेजों में दिखाया गया कि कंपनी इंदिरापुरम थाना क्षेत्र में स्थित है। फाइनेंस कंपनी ने जरूरी कागजात देखकर 2 अगस्त 2023 को लोन पास कर दिया और किस्त के रूप में हर महीने ₹1,67,400 तय की गई।

शुरुआत में कुछ किश्तें जमा करवाई गईं, जिससे किसी को शक न हो। लेकिन बाद में आरोपी किश्त चुकाने से मुकर गए। जब फाइनेंस कंपनी ने दिए गए पते पर जाकर सत्यापन किया, तो पाया गया कि वहां कोई भी कंपनी अस्तित्व में नहीं है और पूरा पता फर्जी निकला।

पुलिस जांच के बाद गिरफ्तारी

धोखाधड़ी का पता चलने पर फाइनेंस कंपनी ने इंदिरापुरम थाने में मामला दर्ज कराया। जांच के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों सुनील और रोहन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

गिरफ्तारी के बाद गुरुवार को दोनों ने अदालत में जमानत के लिए याचिका दाखिल की, लेकिन न्यायालय ने धोखाधड़ी की गंभीरता को देखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।

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