सिवनी, मध्यप्रदेश: सिवनी जिले के महावीर व्यायामशाला के पास एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। 15 जुलाई की शाम से लापता दो मासूम बच्चों की हत्या का राज़ जब खुला, तो हर कोई स्तब्ध रह गया। हत्या का आरोपी और कोई नहीं, बल्कि बच्चों का मौसा निकला, जो उनकी मां से एकतरफा प्रेम करता था।
पूजा ढाकरिया, जो पिछले तीन वर्षों से अपने पति से अलग होकर अपने दो बेटों — मयंक (9 वर्ष) और दिव्यांश (6 वर्ष) — के साथ रह रही थी, मजदूरी और घरों में काम कर अपने बच्चों का पालन-पोषण कर रही थी। दोनों बच्चे स्थानीय स्कूल में पढ़ते थे और मां के साथ ही रहते थे।
15 जुलाई की शाम जब पूजा काम पर गई, तो बच्चे घर पर ही थे। लेकिन जब वह लौटी, तो बच्चे घर से गायब थे। पहले स्थानीय स्तर पर तलाश की गई, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला, तो मामला पुलिस तक पहुंचा। जांच के दौरान संदेह की सुई पूजा के बहनोई भोजराम बेलवंशी की ओर घूमी।
सच आया सामने, मौसा बना जल्लाद
पुलिस ने भोजराम को हिरासत में लेकर पूछताछ की। शुरुआत में उसने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन जब सख्ती से पूछताछ की गई, तो उसने जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार मेहता ने बताया कि भोजराम अपनी साली पूजा से एकतरफा प्रेम करता था और उसे पाने की चाहत में अंधा हो गया था।
बच्चे उसकी राह में बाधा लगते थे और उसे पसंद नहीं करते थे। इसी वजह से उसने एक सोची-समझी साजिश के तहत बच्चों को रास्ते से हटाने का फैसला लिया। फिलहाल पुलिस ने भोजराम को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है और पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है।
आशंका और अविश्वास के बीच मातृपीड़ा
इस पूरे घटनाक्रम से न केवल पूजा ढाकरिया पूरी तरह टूट चुकी है, बल्कि स्थानीय लोग भी इस क्रूरता से स्तब्ध हैं। किसी को यह विश्वास नहीं हो रहा कि एक इंसान महज अपने विकृत प्रेम के चलते दो मासूम जिंदगियों को खत्म कर सकता है।
सवाल खड़े करता है यह मामला
यह मामला महिलाओं की सुरक्षा, घरेलू संबंधों में पनप रहे मनोवैज्ञानिक विकारों और बच्चों की असुरक्षा जैसे कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या समाज ने स्त्रियों को सुरक्षित जीवन जीने का अधिकार दिया है? क्या एकतरफा प्रेम के नाम पर किसी की जिंदगी यूँ छीनी जा सकती है?
न्याय की उम्मीद
पूजा और पूरे समाज की अब यही मांग है कि दोषी को कड़ी से कड़ी सजा मिले, ताकि ऐसी सोच रखने वाले लोगों को सबक मिले और मासूमों की जान यूँ न जाए।


