हरिद्वार- उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने हरिद्वार में करोड़ों की जमीन पर अवैध कब्जे की साजिश में शामिल प्रवीण वाल्मीकि गैंग के दो सदस्यों को बुधवार रात गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक प्रवीण का भतीजा भी शामिल है। जांच में सामने आया है कि सितारगंज जेल में बंद प्रवीण जेल से बाहर अपने साथियों के जरिए संगठित अपराधों को अंजाम देता रहा है।
गंगनहर थाना क्षेत्र में प्रवीण, उसके भतीजे और चार अन्य के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। एसटीएफ की इस कार्रवाई को डीजीपी दीपम सेठ के निर्देश पर चलाए जा रहे राज्यव्यापी अभियान के तहत अंजाम दिया गया है। एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि यह कार्रवाई लगातार मिल रही गंभीर शिकायतों के आधार पर की गई है।
प्रवीण वाल्मीकि पूर्व में कुख्यात अपराधी सुनील राठी के गिरोह से जुड़ा रह चुका है और उस पर हत्या, रंगदारी व अन्य गंभीर अपराधों के कई मामले दर्ज हैं। ताजा मामलों में यह बात सामने आई है कि वह हरिद्वार में ज़मीन कब्जाने और धोखाधड़ी की योजनाएं चला रहा था।
हत्या, धमकी और फर्जी दस्तावेज के जरिए कब्जा
एसटीएफ की जांच में पता चला है कि वर्ष 2018 में प्रवीण ने कृष्ण गोपाल नामक व्यक्ति की हत्या करवाई थी, जो अपने भाई श्याम बिहारी की संपत्ति की देखरेख कर रहा था। हत्या के बाद प्रवीण ने श्याम बिहारी की पत्नी रेखा को धमकाकर जमीन हड़पने की कोशिश की। जब रेखा ने विरोध किया, तो वर्ष 2019 में उसके भाई सुभाष पर जानलेवा हमला भी कराया गया।
इन घटनाओं के चलते रेखा का परिवार डर के कारण घर छोड़कर अन्यत्र चला गया। इस दौरान गैंग ने रेखा और कृष्ण गोपाल की पत्नियों के नाम से फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी बनवाकर करोड़ों की संपत्ति को बेच दिया। इस साजिश में प्रवीण का भतीजा मनीष उर्फ बॉलर (40 वर्ष) और उसका साथी पंकज अष्टवाल (30 वर्ष) शामिल थे, जिन्हें अब गिरफ्तार कर लिया गया है। बाकी आरोपी फरार हैं।
जेल में बनी नई साजिश: साढ़े तीन करोड़ की संपत्ति पर नजर
जांच के दौरान एक और मामला सामने आया जिसमें वर्ष 2022 में जेल में बंद प्रवीण की मुलाकात संदीप एरोन नामक व्यक्ति से हुई। एरोन की कनखल इलाके में साढ़े तीन करोड़ रुपये की संपत्ति थी। जेल से ही प्रवीण ने मनीष और संजय चांदना को इस संपत्ति पर कब्जा करने का निर्देश दिया। जनवरी 2023 में जेल से छूटने के बाद दोनों ने बिना भुगतान किए ही संपत्ति का एग्रीमेंट अपने नाम करवा लिया।
हालांकि, यह बात आशीष शर्मा नामक एक अन्य अपराधी को पता चली, जिसने सुनील राठी को इसकी जानकारी दी। राठी के हस्तक्षेप और धमकी के बाद प्रवीण को यह एग्रीमेंट रद्द करना पड़ा।


