हर जीवन है अनमोल, यही सिखाता है विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस

World Suicide Prevention Day: विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस (World Suicide Prevention Day) हर साल 10 सितंबर को मनाया जाता है, जो हमें जीवन में हो रहे गंभीर बदलावों और मानसिक स्वास्थ्य पर उनके प्रभाव को समझने का अवसर देता है। साल 2024 से 2026 तक इसकी थीम “Changing the Narrative on Suicide” यानी आत्महत्या को लेकर सोच और बातचीत को बदलना हैं। यह दिन दुनिया भर में आत्महत्या जैसे गंभीर मुद्दे पर जागरूकता फैलाने और इसके प्रति बनी सामाजिक झिझक को दूर करने को समर्पित है। इसका मुख्य संदेश है, कदम उठाएँ, उम्मीद जगाएँ जिससे आत्महत्या को रोका जा सकता है।

सही कदम बचाए जीवन 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अंतर्राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम संगठन (IASP) ने मिलकर 2003 में इस दिन की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य आत्महत्या के मामलों को कम करना और लोगों को जागरूक करना था कि सही समय पर सही कदम उठाकर जीवन बचाया जा सकता है

40 सेकंड में जाती है एक जान 

हर साल लगभग 7 लाख से ज्यादा लोग आत्महत्या करते हैं। यानी हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति अपनी जान दे देता है। यह केवल एक संख्या नहीं, बल्कि परिवारों, समाज और समुदाय के लिए गहरा आघात है। ऐसे में यह दिन हमें याद दिलाता है कि बातचीत, समझ और सहयोग से इन मौतों को रोका जा सकता है।

जागरूकता अभियान एक पहल

इस दिन विभिन्न देशों में कार्यक्रम और जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। लोग सोशल मीडिया पर #WSPD जैसे हैशटैग का इस्तेमाल कर संदेश फैलाते हैं, कार्यस्थलों पर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सत्र आयोजित किए जाते हैं और सबसे महत्वपूर्ण—लोग एक-दूसरे की बातें ध्यान से सुनते हैं।

सामान्य बातचीत से रोकना संभव

विशेषज्ञों का मानना है कि आत्महत्या को रोका जा सकता है, यदि हम समय रहते मदद माँगने और देने की पहल करें। जरूरत है मानसिक स्वास्थ्य को सामान्य बातचीत का हिस्सा बनाने की।

सबकी होगी जिम्मेदारी तभी बनेगी बात 

आत्महत्या को रोका जा सकता है पर जिम्मेदारी सबको उठानी होगी व्यक्ति, परिवार, समुदाय और सरकार को मिलकर काम करना होगा। मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच, परामर्श और इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर, संकट की घड़ी में मददगार साबित होती हैं। समुदाय में जागरूकता फैलाना, मानसिक स्वास्थ्य के प्रति कलंक को कम करना और खुली बातचीत को बढ़ावा देना बेहद ज़रूरी है। मीडिया की जिम्मेदार रिपोर्टिंग, घातक वस्तुओं तक पहुंच को कम करना और सामाजिक रिश्तों को मजबूत करना आत्महत्या की आशंका को कम करने के प्रभावी उपाय हैं।

भारत में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम हुआ लागू

भारत में भारतीय दंड संहिता की धारा 309 के तहत आत्महत्या का प्रयास करना अपराध माना गया है। इसमें दोषी पाए जाने पर एक वर्ष तक की कैद, या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।  लंबे समय से इस धारा पर विवाद रहा है, क्योंकि मानसिक तनाव या बीमारी के कारण आत्महत्या का प्रयास करने वाले व्यक्ति को अपराधी ठहराना कई विशेषज्ञों को सही नहीं लगा। 2017 में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम (Mental Healthcare Act, 2017) लागू हुआ। इसके तहत आत्महत्या का प्रयास करने वाले को अब अपराधी नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य सहायता की ज़रूरत वाले व्यक्ति के रूप में देखा जाता है। सरकार की ज़िम्मेदारी है कि ऐसे व्यक्ति को इलाज और पुनर्वास उपलब्ध कराए।

जीवन की उथल पुथल में हम एक दूसरे से बात करना ही छोड़ देते है, कभी कभी किसीको सुनना जरुरी होता हैं तो कभी किसीको ये बताना हम आपके साथ है। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस हमें यही सिखाता है कि हर जिंदगी अनमोल हैं।

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