Category: ब्लॉग

इस साल की गर्मी ने तोड़ा रिकॉर्ड, बिजली की मांग भी आसमान छू रही है

6.1 करोड़ यूनिट से अधिक बिजली की मांग ने बढ़ाई बिजली कटौती की आशंका प्रियांश कुकरेजा इस साल की गर्मी बहुत ज्यादा तेज़ हो रही है, जिससे तापमान लगातार बढ़ रहा है और लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी मुश्किल हो गई है। दोपहर होते ही शहर की सड़कें सुनसान हो जाती हैं क्योंकि लोग गर्मी […]

देहरादून स्मार्ट सिटी मिशन: विकास की ओर एक स्मार्ट कदम

तकनीक, सुविधाएं और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाकर राजधानी को बनाया जा रहा है आधुनिक — लेकिन चुनौतियाँ भी कम नहीं प्रियांश कुकरेजा  देहरादून स्मार्ट सिटी मिशन, जो भारत सरकार की स्मार्ट सिटी योजना के तहत 2017 में शुरू हुआ, उत्तराखंड की राजधानी को एक आधुनिक, पर्यावरण-संवेदनशील और तकनीकी रूप से सशक्त शहर बनाने का […]

महंगाई की चक्की में पिसता आम आदमी

मोनिका यह एक जाना-पहचाना तथ्य है, जिसे आसान शब्दों में समझाया गया है। मुद्रास्फीति (Inflation) का मतलब है कि जब बाजार में बहुत सारा पैसा होता है लेकिन चीजें कम होती हैं, तो अधिक पैसा कम चीजों को खरीदने की कोशिश करता है। नतीजा यह होता है कि लोगों को जरूरी चीजें ज्यादा महंगे दामों […]

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: मददगार तकनीक या नई परेशानी?

वंशिका  आज की दुनिया में सबसे तेज़ बदलने वाली और हमारी ज़िंदगी पर बड़ा असर डालने वाली तकनीक है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)। जो काम पहले इंसानों को घंटों लगते थे, अब AI वो कुछ ही मिनटों में कर देता है। चाहे वह हेल्थकेयर हो, पढ़ाई हो, बिज़नेस हो या मनोरंजन, AI हर जगह काम कर […]

जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहा पूर्वोत्तर भारत

मोनिका  हर बदलाव के पीछे कोई न कोई असर जरूर छिपा होता है — चाहे वह बदलाव कितना ही छोटा क्यों न हो। कई विचारकों और वैज्ञानिकों ने यह बात पहले ही कही है कि हमारे हर कर्म का कोई-न-कोई परिणाम ज़रूर होता है। न्यूटन का तीसरा नियम भी यही बताता है: हर क्रिया की […]

आधुनिकता के अनेक सार्थक पक्ष भी हैं जो समाज को बेहतर बनाते हैं

भारत डोगरा आधुनिक समाज में अनेक स्तरों पर जटिलताएं बढ़ रही हैं। तकनीकी बदलाव तेजी से हो रहे हैं, और सामान्य जनजीवन पर उनका असर बड़े स्तर पर हो रहा है। मोबाइल फोन और सोशल मीडिया को ही लें तो इनका बहुत व्यापक असर हुआ है। दैनिक जीवन को हमने कई स्तरों पर कम समय […]

दक्षेस से भारत को सतर्क रहने की जरूरत

डॉ. ब्रह्मदीप अलूने महाशक्तियों की राजनीतिक और आर्थिक महत्त्वाकांक्षाओं ने तीसरी दुनिया के उभरने की संभावनाओं को सुनियोजित तरीके से खत्म कर दिया है। इसका प्रतिबिंब है दक्षिण एशिया और इन देशों का क्षेत्रीय संगठन दक्षेस जिसे सार्क भी कहा जाता है। अमेरिकी प्रभाव में पाकिस्तान की जमीन का सैन्य कार्यों के लिए उपयोग और […]

एक अच्छे, भले और नेक प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह

हरिशंकर व्यास शीर्षक चौंका सकता है। पर जरा समकालीन भारत अनुभवों और उनकी दिशा में झांके तो अगले बीस-पच्चीस वर्षों की क्या भारत संभावना दिखेगी? भारत पिछले दस वर्षों की विरासत में कदम उठाता हुआ होगा। इस विरासत का मंत्र और अनुभव बुद्धि नहीं लाठी है। हार्वर्ड नहीं हार्डवर्क है। सत्य नहीं झूठ है। सौम्यता […]

बिजली चोरी या फिर अवैध निर्माण जवाबदेही तय हो

रोहित कौशिक इस समय उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर बिजली विभाग किसी भी रूप से बिजली चोरी करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। अतिक्रमण करने और अवैध कब्जा करने वाले लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई कर अवैध कब्जों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है। निश्चित रूप से समाज में संदेश जाना […]

अंडे अहिंसक व शाकाहारी कैसे ?

रजनीश कपूर विज्ञापन जगत ने आम जनता के मन में एक बात बिठा दी है कि अंडे शाकाहारी नहीं हैं। अंडे का उपयोग बढ़ाने के लिए इसे प्रोटीन का बढिय़ा स्रेत बताया जाता है। प्रोटीन की मात्रा बहुत सारी शाकाहारी चीजों में भी काफी ज्यादा है पर इस विवाद में नहीं भी पड़ा जाए तो […]

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