उत्तर प्रदेश: बिसौली कस्बे में स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की शाखा में पांच साल पहले हुए 65 लाख रुपये के गबन के मामले में आखिरकार मुख्य आरोपी संजय को ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन) ने गिरफ्तार कर लिया। लखनऊ से आई टीम ने सोमवार को संजय को शहर के कचहरी तिराहे से गिरफ्तार किया और कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।
कैसे हुआ गबन?
संजय ने यह धोखाधड़ी विद्युत निगम के चेक वाउचरों में हेराफेरी कर की। विद्युत विभाग का खाता पीएनबी बिसौली शाखा में था, जहां उपभोक्ताओं से मिलने वाली धनराशि चेक द्वारा जमा होती थी।
संजय की मां बीरवाला, इसी शाखा में सफाई कर्मचारी थी। उसकी गैरमौजूदगी में संजय को बैंक आने-जाने और कार्य में शामिल होने की अनौपचारिक अनुमति मिल गई थी। बाद में उसने इस स्थिति का दुरुपयोग करते हुए बिजली विभाग की बिलिंग से संबंधित चेकों की धनराशि को अपने परिचितों के खातों में ट्रांसफर करना शुरू कर दिया।
ऐसे हुआ घोटाले का खुलासा
वर्ष 2009 से 2017 तक यह गबन चलता रहा, लेकिन बैंक और विद्युत विभाग को कोई शक नहीं हुआ। जब बकायेदार उपभोक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई और कनेक्शन काटे जाने लगे, तब विद्युत निगम ने रिकॉर्ड की जांच कराई। यहीं से गबन का खुलासा हुआ।
घटना की रिपोर्ट बैंक अधिकारियों ने दर्ज कराई, जिसके बाद शासन ने जांच का जिम्मा ईओडब्ल्यू को सौंपा।
कुल 14 आरोपी, मास्टरमाइंड सहित परिवार के कई सदस्य शामिल
ईओडब्ल्यू की शुरुआती जांच में 7 आरोपियों को नामजद किया गया:
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संजय (मुख्य आरोपी)
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मां बीरवाला (बैंक की सफाईकर्मी)
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पिता भोले नाथ
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भाई संदीप कुमार
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भाई सुजीत की पत्नी बबीता
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अजीत कुमार
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चंद्रपाल
बाद में 7 और नाम सामने आए, जिन्हें भी आरोपी बनाया गया। ईओडब्ल्यू ने इन सभी के खिलाफ गंभीर आर्थिक अपराधों के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
अब तक की कार्रवाई
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संजय को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। अन्य आरोपियों की भूमिका की भी गहन जांच जारी है। पुलिस और ईओडब्ल्यू की संयुक्त टीम आगे की कड़ियां जोड़ रही है ताकि सभी दोषियों को सजा दिलाई जा सके।

