आम तौर पर जब भी हम किसी कंपनी में काम करते हैं तो हम कई ऐसे शब्दावली को पढ़ते हैं जिनसे हम अनजान होते हैं, जिनकी जानकारी हमे नहीं होती। ऐसे ही कुछ टर्मिनोलॉजी के बारे में आज हम बात करेंगे, ईएल, सीएल, और सिक लीव तीनो ही जब हम किसी कंपनी में काम करते हैं तो हमे मिलती हैं।
अर्जित छुट्टी जो हर सेक्टर में है अलग
ईएल को कहते है अर्जित छुट्टी (Earned Leave) नाम से ही जाहिर है की वो छुट्टी जिससे हम खुद कमाते हैं एक सवेतन अवकाश है जो कर्मचारियों को उनकी सेवा अवधि या कार्य प्रदर्शन के आधार पर मिलता है। यह कर्मचारियों को आराम, व्यक्तिगत जिम्मेदारियाँ और छुट्टियों के लिए समय देता है, जिससे कार्य-जीवन संतुलन और कार्य करने की क्षमता बढ़ती है। भारत में सरकारी कर्मचारियों के लिए अप्रयुक्त ईएल 300 दिन (केंद्र) और 180 दिन (राज्य) तक बढ़ाया जा सकता है, जबकि निजी कंपनियाँ आमतौर पर 30-120 दिनों तक संचय की अनुमति देती हैं। तो अगर आप किसी निजी कंपनी में काम करते है तो यहा मिलना थोडा मुश्किल होता है।
अचानक मिलने वाली छुट्टी हैं कैजुअल लीव
कैजुअल लीव (Casual Leave) या आकस्मिक अवकाश महीने में कभी कभी दी जाने वाली छुट्टी है। अचानक कभी किसी कर्मचारी को कोई अवश्यक काम आ गया या कोई पर्सनल वर्क तब यह छुट्टी काम आती है। यह वेतनभोगी अवकाश होता है जोकि आपकी तनख्वाह में कोई असर नहीं डालता. यह लम्बे समय की छुट्टियों से अलग होता है। अब अचानक कभी किसी परिस्तिथि में फस जाओ तब आप इस छुट्टी का इस्तमाल कीजिएगा।
बीमार होने पर सिक लीव
जब कभी आप बीमार हो जाए और आप किसी कंपनी में काम करते हो तो सिक लीव आपको दी जाती है। यह भी एक सवेतन छुट्टी है, जिसमे कर्मचारी को स्वस्थ होने के लिए कुछ दिनों की छुट्टी दी जाती हैं। भारत में सिक लीव यानी बीमारी की छुट्टी के लिए कोई एक केंद्रीय कानून मौजूद नहीं है। इसकी व्यवस्था आम तौर पर कंपनियों की नीतियों और संबंधित अधिनियमों के आधार पर होती है, विशेषकर कारखानों के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार। निजी क्षेत्र में सामान्य तौर पर कर्मचारियों को प्रति वर्ष लगभग 12 दिन सवेतन बीमारी की छुट्टी दी जाती है। अगर छुट्टी तीन दिन से अधिक हो, तो डॉक्टर का प्रमाणपत्र जमा करना आवश्यक होता है। सिक लीव कितनी मिल रही है इसके लिए कंपनी द्वारा दिया गया बोंड पेपर जरुर पड़े।
हमारे भारत देश में चाहे फिर वो सरकारी हो या निजी कुछ अवकाश निर्धारित किए गए है, भले ही वो सरकारी में ज्यादा और प्राइवेट में कम हो, पर दी जाती है. जरुरत है बस जागरूक होने की जब भी आप एक कर्मचारी के तौर पर कही काम करना शुरू करे तो अपने अधिकारों के बारे में जरुर जाने और किसी भी बोंड या अग्रीमेंट पेपर में हस्ताक्षर (Sign) करने से पहले अपने वकील या बड़ों से सलाह जरुर ले।


