आयुषी
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित दयारा बुग्याल की खूबसूरत वादियां इन दिनों एक रहस्यमयी गुमशुदगी के कारण सुर्खियों में हैं। नैनीताल जिले की 24 वर्षीय एमबीए छात्रा बबीता पांडे पिछले कई दिनों से लापता हैं। उनके गायब होने की घटना ने न केवल परिवार बल्कि पूरे प्रदेश को चिंता में डाल दिया है। पुलिस, एसडीआरएफ, वन विभाग और स्थानीय प्रशासन लगातार खोज अभियान चला रहे हैं, लेकिन अब तक उनका कोई पता नहीं चल सका है।रामनगर क्षेत्र के चिल्किया गांव निवासी बबीता पांडे अपने दो दोस्तों के साथ उत्तरकाशी घूमने निकली थीं। जानकारी के अनुसार तीनों ने पहले गंगोत्री क्षेत्र का भ्रमण किया और बाद में दयारा बुग्याल ट्रैक पर ट्रेकिंग के लिए पहुंचे। दयारा बुग्याल उत्तराखंड के सबसे लोकप्रिय हाई-एल्टीट्यूड ट्रेक्स में गिना जाता है, जहां हर साल हजारों पर्यटक पहुंचते हैं।
29 मई की रात तीनों ट्रेकर्स ने घोई कैंपसाइट क्षेत्र में पड़ाव डाला। बताया जाता है कि देर रात बबीता कैंप से बाहर निकलीं, लेकिन उसके बाद वह वापस नहीं लौटीं। जब काफी देर तक उनका कोई पता नहीं चला तो साथियों ने तलाश शुरू की और बाद में प्रशासन को सूचना दी गई।जांच एजेंसियों के अनुसार बबीता को आखिरी बार ट्रेक रूट के आसपास देखा गया था। मीडिया रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि एक फुटेज में वह वाहन से उतरती दिखाई दीं और किसी को फोन करती नजर आईं। हालांकि पुलिस अभी इस फुटेज और कॉल रिकॉर्ड से जुड़े तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि करने में जुटी हुई है।यही आखिरी ज्ञात गतिविधि मानी जा रही है, जिसके बाद उनका कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिला।
सूचना मिलते ही एसडीआरएफ, पुलिस, वन विभाग और स्थानीय स्वयंसेवकों की संयुक्त टीमों ने खोज अभियान शुरू किया। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र, घने जंगल, खाई और लगातार खराब मौसम के कारण राहत एवं बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।खोज अभियान के दौरान ड्रोन कैमरों, डॉग स्क्वायड और आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया गया। टीमों ने घोई कैंपसाइट से लेकर दयारा बुग्याल के विभिन्न ट्रेल्स और जंगलों को खंगाला, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी।तलाशी अभियान के दौरान जांच एजेंसियों को ट्रेकिंग परमिट से जुड़ी कुछ संदिग्ध जानकारियां भी मिलीं। रिपोर्टों के अनुसार बबीता और उनके साथियों के नाम एक कथित फर्जी या एक्सपायर्ड परमिट पर दर्ज पाए गए। इसके बाद प्रशासन ने ट्रेकिंग परमिट व्यवस्था की भी जांच शुरू कर दी है।हालांकि अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल प्राथमिकता बबीता को सुरक्षित ढूंढना है और परमिट संबंधी मामले की अलग से जांच की जा रही है।खोज अभियान के दौरान एक झील और उसके आसपास का क्षेत्र जांच एजेंसियों के फोकस में आया है। इसी कारण एसडीआरएफ की विशेष डीप-डाइव सर्च टीम को भी लगाया गया है।गोताखोरों और विशेषज्ञों की मदद से झील के भीतर और आसपास के क्षेत्रों की गहन तलाशी की जा रही है।अधिकारियों को उम्मीद है कि इस खोज से मामले में कोई महत्वपूर्ण सुराग मिल सकता है।
दिन बीतने के साथ परिवार की चिंता लगातार बढ़ रही है। बबीता के परिजन उत्तरकाशी पहुंच चुके हैं और लगातार प्रशासन के संपर्क में हैं। परिवार का कहना है कि बबीता अनुभवी और जिम्मेदार युवती थीं तथा बिना किसी कारण अचानक गायब होना कई सवाल खड़े करता है।दयारा बुग्याल की शांत वादियों में शुरू हुई यह ट्रेकिंग यात्रा अब एक रहस्यमयी गुमशुदगी में बदल चुकी है। लगातार चल रहे सर्च ऑपरेशन के बीच परिवार, प्रशासन और आम लोग एक ही उम्मीद लगाए बैठे हैं—कि बबीता पांडे सुरक्षित मिल जाएं और इस रहस्य से पर्दा उठ सके।

