समीक्षा सिंह
इन दिनों भारत कई तरह के प्राकर्तिक आपदाओं से जूझ रहा है , कहीं बारिश और बदल फटने से तबाही मच रही है , तो कहीं गर्मी जान ले रही है। पहाड़ो से लेकर मैदानों तक हर जगह मौसम का मिजाज अचानक से बदल रहा है और अपना भयंकर रूप दिखा रहा है । ये घटनाएं न सिर्फ मौसम के बदलाव को दर्शाती है बल्कि ये बताती है की हमें अब सतर्क रहने की ज़रूरत है।
हाल ही में हिमाचल प्रदेश के कुल्लू और कांगड़ा जिलों में जबरदस्त तबाही हुई। 25 और 26 जून 2025 को कुल्लू के जीवा नाला, रहला बिहाल और शिलागढ़ इलाकों में बादल फटने से भारी बाढ़ आ गई। इस बाढ़ ने कई घरों, दुकानों, स्कूलों, सड़कों और पुलों को बर्बाद कर दिया। वहीं कांगड़ा के मणुनी खड्ड में अचानक आई बाढ़ से लगभग 20 मजदूर बह गए और 2 की मौत हो गई। कुल्लू में 3 लोग अभी भी लापता हैं। मौसम विभाग ने भारी बारिश और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है।
उत्तराखंड में भी हालात खराब हैं। 20 जून को उत्तरकाशी के ओदटा गांव में एक घर भारी बारिश के कारण गिर गया, जिसमें एक ही परिवार के 4 लोगों की जान चली गई। राज्य में मानसून की शुरुआत के बाद से अब तक कुल 11 लोगों की मौत हो चुकी है और 7 लोग घायल हुए हैं। बागेश्वर और अल्मोड़ा जैसे इलाकों में भारी बारिश की वजह से कई सड़कें बंद हो गई हैं और लोग फंसे हुए हैं।
देश के कई हिस्से इस समय भयानक गर्मी की चपेट में हैं। अप्रैल 2025 से शुरू हुई गर्मी की लहर ने राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में हालात बिगाड़ दिए हैं। श्रीगंगानगर में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। अब तक गर्मी के कारण 450 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। साथ ही पानी की कमी और बिजली की दिक्कतों ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
इसके अलावा फरवरी 2025 में उत्तराखंड के माणा गांव के पास हिमस्खलन (बर्फ गिरना) की घटना भी हुई थी, जिसमें BRO (सीमा सड़क संगठन) के शिविर पर बर्फ गिरने से 8 लोगों की मौत हो गई थी। यह घटना दिखाती है कि अब मौसम में अचानक बड़ा बदलाव आ रहा है।
“देश के कई हिस्सों में प्राकृतिक आपदाओं के चलते अभी यात्रा करना टालना ही समझदारी है।” चाहे वो चार धाम यात्रा हो या लोग खुद से घुमने का विचार कर रहे हो।
इन सभी घटनाओ से ये साफ़ है की हम अपने शहरों और गांवों को मौसम की मार से बचाने के लिए मजबूत तैयारियाँ करें। लोगों को मौसम की जानकारी समय पर मिले, इसके लिए सिस्टम बेहतर बनाना होगा। साथ ही हमें यह भी समझना होगा कि ये आपदाएं जलवायु परिवर्तन (climate change) का हिस्सा हैं। अगर अब भी हम नहीं सुधरे , तो आगे नुकसान और भी बढ़ सकता है।

