ऋषिकेश, नैनीताल और मसूरी में पर्यटकों की भारी भीड़ के बीच घंटों तक ट्रैफिक जाम; प्रशासन की तैयारियां नाकाफी साबित, यात्रियों को झेलनी पड़ी भारी परेशानी।
प्रियांश कुकरेजा
उत्तराखंड, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है, इस समय पर्यटकों की भारी भीड़ से जूझ रहा है। वीकेंड और छुट्टियों के दौरान राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह से बेकाबू हो गई है। हरिद्वार, ऋषिकेश, मसूरी, नैनीताल और हल्द्वानी जैसे प्रमुख शहरों में सड़कों पर लंबा जाम लगना आम बात हो गई है, जिससे पर्यटकों को घुमने की जगह तक पहुंचने में कई घंटे लग रहे हैं।
रविवार को ऋषिकेश में करीब 12 किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिससे पर्यटकों को सिर्फ 40-45 मिनट की दूरी तय करने में 5 से 6 घंटे तक का समय लग गया। नैनीताल के प्रसिद्ध कैंची धाम मार्ग पर भी 7 किलोमीटर लंबा जाम देखा गया, वहीं मसूरी में भी सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। प्रशासन द्वारा कई जगहों पर भारी वाहनों की एंट्री रोकी गई, ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया, और पार्किंग की व्यवस्था सुधारने की कोशिश की गई, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात में खास सुधार नहीं हुआ है। सड़क मरम्मत कार्य, सीमित पार्किंग स्पेस, अनियंत्रित वाहन संख्या और पर्यटकों की लापरवाही जैसे कई कारण इस समस्या को और भी जटिल बना रहे हैं। देहरादून से मसूरी जाने वाले मार्ग पर भी कई किलोमीटर लंबा जाम लगा, जिससे स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। चारधाम यात्रा के दौरान भी केदारनाथ और बद्रीनाथ जाने वाले रूट पर ट्रैफिक जाम आम हो गया है।
सरकार ने स्थायी समाधान की दिशा में कार्य शुरू करते हुए इलेक्ट्रिक बसें शुरू करने, ऑनलाइन पार्किंग बुकिंग और भीड़ नियंत्रण के लिए पंजीकरण व्यवस्था लागू करने की योजना बनाई है। लेकिन जब तक यात्रियों में ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूकता नहीं आएगी और अव्यवस्थित भीड़ नियंत्रण की नीति में सुधार नहीं होगा, तब तक हर छुट्टी में उत्तराखंड के हिल स्टेशनों पर ऐसे ट्रैफिक जाम की तस्वीरें आम बनी रहेंगी।

