यमकेश्वर क्षेत्र इतना विकसित की एम्बुलेंस सड़को पर नहीं कंधों में दौड़ रही है। देखिए तस्वीरें

यमकेश्वर प्रखण्ड कहने को तो जिला पौड़ी का वह विकासखंड है जो देहरादून जिले से सटा हुआ है, हरिद्वार, टिहरी गढ़वाल इसकी सीमा से लगते है, लेकिन विकास से कोसो दूर है। मूलभूत सुविधा जैसे सड़क ,स्वास्थ्य, शिक्षा, का तो मानो अभाव ही है। यमकेश्वर के गाँव में सड़क नही होने से लोग मरीजों को कंधे में उठाकर मुख्य सड़क तक लाने को मजबूर है।
यमकेश्वर के ग्राम सभा व क्षेत्र पँचायत बूंगा का तोक गाँव वीरकाटल निवासी श्री नरेन्द्र सिंह रौथाण जी की तबियत ख़राब हो गयी तो उन्हें गाँव के निवासियों द्वारा कंधों में बिठाकर मुख्य सड़क मोहनचट्टी तक लाया गया ,उसके बाद निजी वाहन की सहायता से एम्स ऋषिकेश में भर्ती किया गया। नरेन्द्र रौथाण को कंधे पर गाँव के निवासी कमल, राजेश, मंजीत उपेंद्र, अर संजीव अन्य युवा वर्ग ऊँन्हे कंधो में बिठाकर मुख्य सड़क मार्ग तक लाये।
इस बाबत सुदेश भट्ट, क्षेत्र पंचायत सदस्य बूंगा ने बताया कि क्षेत्र में सड़क नही होने से बड़ी समस्याओं का सामना हर रोज ग्रामीणों को करना पड़ता है। बूंगा – रणखोली- वीरकाटल सड़क 10 साल पहले स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन आज तक विभागीय कागजो में धूल फांक रही है, यदि यह सड़क बन गयी होती तो आज नरेंद्र रौथाण को कंधे में बिठाकर ले जाने की नौबत नही आती। इसी तरह वीरकाटल गधेरे में बनी पुलिया 2014 में आपदा की भेंट चढ़ गया जो आज तक दोबारा नही बन पाया। उन्होंने यह भी बताया कि इस पुलिया में बिजली के पोल रखकर लोग जान जोखिम में डालकर उसके ऊपर चल रहे हैं।

यह तो बूंगा वीरकाटल सड़क तो एक उदाहरण ही है, ऐसे ना जाने कितने गाँव आज भी मूलभूत सुविधाओ के अभाव में जीने को मजबूर हैं

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