जनता की भलाई के लिए कब जागेंगे जनप्रतिनिधि, कब मिलेगा गरीब बच्चों को इन्साफ- रोशन रतूड़ी

देहरादून, ब्यूरो | काफी लम्बे समय से देश के लोगों की सेवा करते आ रहे उत्तराखंड देवभूमि के देवदूत समाज सेवी रोशन रतूड़ी एक बार फिर से अपने कार्यों के लिए सुर्ख़ियों में छा रहे हैं। आपको बता दें कि समाज सेवी रोशन रतूड़ी अभी तक विदेश में फंसे 1000 से अधिक लोगों की मदद कर चुके हैं। जिसमें कि केवल भारतीय ही नहीं बल्कि अन्य देशों के लोग भी शामिल हैं। रोशन का कहना है कि इंसानियत का कोई धर्म या फिर कह सकते हैं कोई देश नहीं होता। इंसानियत के नाम पर पूरे विश्व के लोग सामान हैं, और इस विचारधारा को मन में रखते हुए वे हमेशा से सभी लोगों की मदद करते आ रहे हैं। रोशन रतूड़ी का कहना है कि, केवल सरकार ही नहीं बल्कि जो भी लोग एक समृद्ध जिन्दगी जी रहे हैं, उनका भी ये कर्त्तव्य बनता है कि वे हमारे देश के गरीब किसान व गरीब लोगों की आगे बढ़ने में मदद करें। उन्हें प्रोत्साहित करें, अपनी इच्छानुसार आर्थिक मदद करें। इस से देश में एकता की भावना बनी रहेगी तथा इस से किसी के भी मन में एक दुसरे के प्रति हीन भावना नहीं आएगी।

रोशन का मुख्य उद्देश्य देशभर के लोगों की इंसानियत को जगाना तथा साथ ही सभी असहाय लोगों को न्याय दिलाना है। हमें भी रोशन रतूड़ी की विचारधाराओं का समर्थन करते हुए उनका साथ देना चाहिए। जिससे देश का विकास भी होगा तथा सभी भारतवासियों के अन्दर एकता की भावना भी जागेगी। इंसानियत की इस कड़ी में उन्होंने इस बार एक प्राइमरी स्कूल के मुद्दे को लेकर सरकार व जनप्रतिनिधियों के सामने बात रखी है, क्योंकि गरीब लोगों को कोई भी नहीं पूछता और उनकी हालत वैसी की वैसी ही रह जाती है। रोशन का सरकार व जनप्रतिनिधियों से ये सवाल है कि क्या देश के गरीबों को आगे बढ़ने का हक़ नहीं है! क्या गरीबों का विकास करना आपका प्राथमिक कर्त्तव्य नहीं है? अगर है तो उन लोगों को न्याय कब मिलेगा !

दरअसल बात भगवानपुर-जूलों, बेसिक प्राइमरी पाठशाला, देहरादून की है। यहाँ की हालत बहुत ही ज्यादा जर्जर हाल में है। यह विद्यालय सहसपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। पिछले 2 सालों से इस विद्यालय की हालत बहुत ही ज्यादा नाज़ुक हाल में है। अक्सर बरसात के समय पर बच्चे पढाई करते-करते भीग जाते हैं। ना तो ठीक से पढ़ पाते हैं और ऊपर से स्कूल के हर कोने से पानी टपकता रहता है। जबकि यह स्कूल सड़क के बीचों-बीच बना है, लेकिन फिर भी किसी नेता की नज़र इसके ऊपर नहीं पड़ती या यूँ कह सकते हैं कि सभी नेता यहाँ से गुजरकर इसे देखने के बावजूद अनदेखा कर लेते हैं। ऐसे जनप्रतिनिधियों के लिए यह शर्म की बात है, जब वे अपनी जनता के लिए ही नहीं सोच सकते तो वह लोग इस ओहदे पर बैठते ही क्यों हैं।

बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं, अमीर लोगों के बच्चे तो बड़े-बड़े स्कूलों में पढ़ते हैं, लेकिन उनका क्या जो मां-बाप इतनी ज्यादा फीस नहीं भर सकते। वो लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में डाल देते हैं। पर क्या फायदा पढाई के नाम पर ऐसी धान्धलीबाजी हो रही है। बच्चे पढने के लिए तो घर से निकल जाते हैं, लेकिन उन्हें विद्यालय में ऐसा मंजर देखना पड़ता है। चुनाव लड़ने के पहले सभी नेता बहुत बड़े बड़े वादे कर जाते हैं और चुनाव जीतने के बाद सभी अपनी-अपनी जेबें भरने में इस तरह से लग जाते हैं कि उनको जनता का ख़याल ही नहीं आता।

इतना सब देखने के बाद रोशन रतूड़ी ने विद्यालय की मरम्मत खुद से करने का फैसला लिया और इस बारे में स्कूल की प्रधानाध्यापिका से भी बात की। लेकिन आज तक उनका कोई भी जवाब नहीं मिला है। स्कूल कि हालत दिन प्रतिदिन एक बीमार युवक की तरह बिगडती ही जा रही है, और ना जाने कब ये बच्चों के लिए एक बड़ा ख़तरा बन के सामने आ जाए। अक्सर हर जगह गरीब लोगों के बच्चों को ही परेशानियाँ उठानी पड़ती हैं, यदि उनके पास पढाई के संसाधन के रूप में इस प्रकार की सुविधायें रहेंगी तो बच्चों का भविष्य कैसे बन पायेगा, जब उनके पास केवल पढने तक के लिए एक सही जगह नहीं है।

लोग नेता बनकर सरकार तो बना लेते हैं, लेकिन इंसानियत के नाम पर विकास के लिए एक भी रुपया खर्च नहीं कर पाते। ये तो दूर कि बात है ऐसे नेता लोग सरकार से आया विकास का पैसा भी चट कर जाते हैं और किसी को हवा तक नहीं लगती। उन्हें केवल चुनाव तथा वोट की चिंता रहती है। जनता तथा जनता के विकास की नहीं। ऐसे नेताओं को भी एक बात ध्यान में रखनी चाहिए। यदि जनता कुर्सी पर बिठा सकती है तो जनता कुर्सी से उठा भी सकती है। जनता की भावनाओं के साथ ना खेला जाये तो सभी के लिए बेहतर होगा। जनता सबके हथकंडों को अच्छे से जानती है। कहीं अगली दुर्घटना आपके साथ ना हो जाए, क्या पता आपसे आपका ओहदा भी छीन लिया जाए, इसलिए अगर आप जनता की भलाई के नाम पर उस कुर्सी पर बैठे हो तो जनता की भलाई करना भी सीखो।

 

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