उत्तराखंड का एक और लाल एजेंट के धोखे से विदेश में हुआ लापता, रोशन रतूड़ी ने ढूंढने का उठाया बीड़ा

आये दिन हम यह सुनते हैं कि आज एक और उत्तराखंड का लाल किसी एजेंट के चक्कर के फंस गया है और विदेश में कहीं है जिसका कुछ पता नहीं लग रहा है या वह वहां पर बंधुवा मजदुर की तरह काम कर रहा है। कुछ असामाजिक तत्वों ने इसे अपना एक बहुत मुनाफे वाला बिज़नस बना लिया है जिसमे सिर्फ और सिर्फ मुनाफा ही होता है। क्योंकि आज हम सभी को एक अच्छी नौकरी चाहिए जिससे हम अपने परिवार का पालन पोषण कर सकें। बस इसी बात का फायदा यह लोग उठाते हैं  और आपकी जीवन भर की कमाई पर कब हाथ साफ कर देते हैं किसी को पता ही नहीं लगता है और जब तक हम यह सारा खेल समझते हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।

ऐसे ही विदेशों में फंसे लोगों के लिए देवदूत की तरह काम करने वाला उत्तराखंड का लाल समाज सेवी रोशन रतूड़ी ने कई बार बोला है कि ऐसे एजेंटों के चक्कर में मत फंसा करो। सालों से तो मैं ही सुनता आ रहा हूँ कि विदेश में नौकरी पाने के लिए जिस एजेंट से आपकी बात हो रही है पहले उसकी जांच अच्छे से कर लो ऐसा रोशन रतूड़ी को बोलते हुए। लेकिन बेरोजगारी का आलम यह है कि कोई कुछ समझने को तैयार ही नहीं है। 600 से जादा लोगों को तो अकेले रोशन रतूड़ी ने ही विदेश से निकला है और हर बार बताया है कि गलत एजेंट के चक्कर में न पड़ें, पहले अच्छे से जांच करें तभी किसी को पैसे दें।

आज एक बार फिर रोशन रतूड़ी हमारे एक ऐसे ही भाई का मुद्दा ले कर हम सबके सामने आये हैं। मलेशिया से उत्तराखंड का एक बेटा पिछले कुछ समय से लापता है जिसका नाम है वीरेन्द्र कुमार आर्य जिला-बागेश्वर, बैजनाथ, गाँव-भकुनखोला के रहने वाले हैं। उनके पिता का नाम किशन राम है। वीरेन्द्र का परिवार सदमे में है, उनको कुछ पता नहीं है कि उनका बेटा कहाँ है। वीरेन्द्र के पिता के अनुसार उन्होंने ऐजेंट को साढ़े तीन लाख रुपये दिये हैं। एजेंट का नाम है प्रिंस उर्फ़ प्रवेश बताया जा रहा है, जो की मलेशिया के शिबू, सरावक, शहर में रहता है। वीरेन्द्र के परिवार की की मदद के लिए रोशन रतूड़ी आगे आए हैं। उनका कहना है कि “मलेशिया के क्वालालाम्पुर शहर में जिस किसी भाई-बहन को वीरेन्द्र कुमार आर्य का पता लगे, या आप में से किसी ने इनको देखा हो। मेरा हाथ जोड़कर प्रार्थना कि आप मुझे तुरंत सम्पर्क कर सकते हैं। रोशन रतूड़ी ने अपना वॉट्सएप नम्बर +971-5040-91945 भी सबके साथ साझा किया है। जिससे उनको आसानी से संपर्क किया जा सके और महत्वपूर्ण सुचना दी जा सके।

रोशन रतूड़ी जी ने बताया कि इनका बहुत बड़ा गिरोह चल रहा है। गिरोह के कुछ दलालों के नबर मुझे प्राप्त हो चुके हैं। दलालों नें वीरेन्द्र कुमार को कहा कि आपको ‘मर्चेंट नेवी शिप’ मैं नौकरी देंगे और सैलरी भी बहुत ज़्यादा मिलगी। जिसके लिये वीरेन्द्र ने 6 महीने का कोर्स भी किया और 25 जनवरी 2019 को विरेंद्र भुवनेश्वर से मलेशिया के लिए रवाना हुआ था। वीरेन्द्र कुमार के पिता ने बेटे की नौकरी के लिये पहले 2 लाख रूपये नगद दिए और इसके बाद 55,000, फिर 25,000 हज़ार और 35,000 हज़ार रुपये उसके बैंक खाते में जमा करवाए। वीरेन्द्र कुमार के पिता ने सोचा था कि उनके बेटे का अच्छा भविष्य बन जायेगा।

कुछ दिन पहले वीरेंद्र कुमार की तबियत ख़राब हो गयी थी उसको हॉस्पिटल लाया गया, आप तस्वीरों में देख सकते हैं। कहा जाता है उसको बहुत सताया गया है जिस कारण उसके दिमाग पर असर पढ़ा है। वो अपना पासपोर्ट भी खो चुका है। वीरेन्द्र कुमार B.A फ़ाइनल कर रहा था, लेकिन उसको क्या पता था कि उसके साथ एक दिन ऐसा होगा ।

वीरेन्द्र कुमार के परिवार ने रोशन रतूड़ी जी से मदद मांगी है कि वह उनके बेटे को सकुशल वापस घर ले आयें। रोशन रतूड़ी ने वीरेन्द्र के परिवार से वादा किया है कि वह और उनकी पूरी टीम अपनी पूरी कोशिश करेगी और वीरेन्द्र का पता लगाएगी तथा वीरेन्द्र को उसके परिवार से मिलाने का हर संभव कार्य करेगी। हम भगवान से प्रार्थना करते है कि वीरेन्द्र कुमार जहाँ भी हो सुरक्षित सकुशल हो। बहुत जल्दी उसको हम ढूँढ निकालेंगे।

“मलेशिया देश के कवालामपुर शहर में जिस किसी भाई-बहन को विरेंद्र कुमार आर्य का पता लगे, या आप में से किसी ने इनको देखा हो…

Gepostet von Roshan Raturi RR am Mittwoch, 12. Juni 2019

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