तीन महीने, 133 गांव, 216 बच्चे लेकिन बेटी एक भी नहीं

Image result for beti bachao beti padhaoउत्तराखंड के उत्तरकाशी में तीन महीने में 133 गांवों में 216 बच्चों ने जन्म लिया लेकिन इसमें एक भी बेटी नहीं जन्मी। उत्तरकाशी जिले की ये रिपोर्ट सरकार के ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियानों की सच्चाई दिखा रही है। सरकारी आंकड़ों में इसका खुलासा होने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और इसकी जोच शुरू कर दी है।

बता दें कि स्वास्थ्य विभाग सभी जिलों के हर गांव में होने वाले प्रसवों का ब्योरा तैयार करता है। पिछले अप्रैल से जून 2019 में उत्तरकाशी जिले के गांवों की रिपोर्ट जब सामने आई तो जिम्मेदार अधिकारी भी हैरत में पड़ गए। इस रिपोर्ट के मुताबिक जिले के 133 गांवों में तीन महीने में कुल 216 प्रसव हुए, लेकिन यह हैरत की बात है कि इनमें एक भी बेटी ने जन्म नहीं लिया।

गंगोत्री विधायक गोपाल रावत और जिलाधिकारी डॉ.आशीष चैहान ने इस रिपोर्ट से संबंधित गांवों की आशा कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की और ऐसा होने के कारणों की भी पड़ताल करने की कोशिश की।

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डीएम ने बताया कि इन सभी गांवों को रेड जोन में शामिल किया गया है। उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं को नियमित रूप से मदर चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए। वहीं, विधायक ने एएनएम एवं आशा कार्यकर्ताओं को आपसी समन्वय एवं जिम्मेदारी के साथ कार्य करने को कहा।

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साल 2011 की जनगणना में उत्तरकाशी जिले में महिला एवं पुरुषों की संख्या में कोई ज्यादा अंतर नहीं था। यहां एक लाख 68 हजार 597 पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की जनसंख्या एक लाख 61 हजार 489 थी। इसके बाद सरकार द्वारा ‘कन्या भू्रण हत्या निषेध’ को लेकर जागरुकता अभियान चलाए गए और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान से और सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन इस रिपोर्ट में जो आंकड़े सामने आए हैं उन्होंने ऐसे तमाम अभियानों को फेल कर दिया है।

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