जब सुपीन नदी ने लिया रौद्र रूप, एक मात्र लकडी का पुल बहा, दो गर्भवती महिलाओं को लौटना पडा अपने घर

आजकल बरसात के दिन आते ही पहाड़ों की जिंदगी किस कदर वीरान हो जाती है, कि वृद्धजनों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए सड़क मार्ग तक आने के लिए सभी सम्पर्क मार्ग टूट जाते हैं। इसी तरह उत्तरकाशी के मोरी ब्लाक जो सूदूरवर्ती है वहॉ के आधा दर्जन गॉव बारिश और पिघलते हिमखण्ड आफत बनकर मुह खोले खड़े हुए हैं। उत्तरकाशी मे बहने वाली जुड़वा बहिने रूपीन और सुपीन में से सुपीन आजकल बरसात में विकराल रूप घारण किये हुए हैं। जिस कारण खे़ड़ा घाटी मे बना एकमात्र लकड़ी की पुलि का 15 मीटर जाने का रास्ता भी नदी की भेंट चढ गया है। जिस कारण लिवाड़ी फिताड़ी समेत आधा दर्जन गॉव के सम्पर्क मार्ग पूरी तरह से अवरूद्ध हो गये है। हालात इस कदर हो गये हैं कि गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों को उपचार कराने के लिए अस्पताल आ रहे लोगों को खेड़ाघाटी से मायूस होकर वापस जाना पड़ा।

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उत्तरकाशी के सूदूरवर्ती क्षेत्र मोरी प्रखण्ड से लगे गॉ रेक्चा, कासला, राला, लिवाड़ी फिताड़ी इस सुपीन नदी के सीमावर्ती गॉव हैं। इन गॉवों के लिए 70 साल बाद भी सड़क नहीं बन पायी है। इस कारण आज भी यहॉ के निवासियें को 15 किलोमीटर पैदल चलकर जखोल आना पड़ता है। आजकल बरसात के कारण पैदल चलने वाला रास्ता भी खतरों का खिलाड़ी बना हुआ है। इस पर जिलाधिकारी डॉ आशीष चौहान का कहना है कि खेड़ा घाटी में पुलिया के बह जाने और रास्ता बंद होने की उन्हे जानकारी नहीं है। अब मामला संज्ञान में आया है इस हेतु बड़कोट एसडीएम को निर्देश जारी कर रिपोर्ट मॉगी गयी है।

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