उत्तराखंड : जंगलों को आग से बचाने के लिए पुरस्कार का रास्ता अपनाएगी सरकार, सबसे पहले आग बुझाने पर मिलेंगे एक लाख

जंगलों को आग से बचाने के लिए सरकार दंड के साथ ही पुरस्कार का रास्ता अपनाएगी। आग लगाने पर वन विभाग को नामजद या अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, जो टीम सबसे पहले आग बुझाएंगी उसे एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।

वन मंत्री डा. हरक सिंह रावत का कहना है कि प्रत्येक डिवीजन में प्रथम आने वाली टीम को एक लाख रुपये पुरस्कार दिया जाएगा। प्रदेश मेें दावानल की समस्या विकराल होती जा रही है, लेकिन वन विभाग आग लगाने वालों को पकड़ नहीं पा रहा है और आग बुझाने में भी असफल साबित हो रहा है। इन दोनों समस्याओं के समाधान के लिए वन मंत्रालय ने भय के साथ ही प्रोत्साहन की नीति अपनाने का निर्णय लिया है।

वन मंत्री डा. रावत ने कहा कि आग बुझाने में जन सहभागिता बढ़ाने के लिए पुरस्कार दिया जाएगा। प्रत्येक डिवीजन में आग बुझाने मेें सबसे आगे रहने वाली टीम  को 1-1 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। यानि कि प्रदेश की सभी 39 डिवीजन में 39 टीमों को 1-1 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।  जबकि द्वितीय स्थान पर रहने वाली चार टीमों को 51-51 हजार और तृतीय स्थान पर रहने वाली 10 टीमों को 31-31 हजार रुपये पुरस्कार के तौर पर दिए जाएंगे।

सिविल एवं सोयम वन प्रभाग के अधिकारियों को भी रिजर्व वन प्रभाग की तरह जंगल को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ केस दर्ज करने का अधिकार मिलेगा।

दरअसल, सिविल एवं सोयम प्रभागीय वनाधिकारी सोहन लाल, वन मंत्री के संज्ञान में यह मामला लाए कि जंगल में आग लगाने वालों के खिलाफ केस करने के लिए पटवारी चौकी में मुकदमा दर्ज कराना पड़ता है।

जबकि रिजर्व वन क्षेत्र में आग लगाने पर संबंधित रेंज में केस दर्ज हो जाता है। जिस पर मंत्री ने कहा कि शीघ्र शासनादेश जारी कर सिविल एवं सोयम वन प्रभाग को भी केस दर्ज करने के अधिकार दिए जाएंगे।

जब तक यह व्यवस्था होती है, राजस्व पुलिस चौकी में केस दर्ज कराए जाएंगे। सहयोग के लिए जिलाधिकारियों को निर्देशित किया जाएगा।

 

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