हरिद्वार: शक्तिपीठों और अखाड़ों के लिए प्रसिद्ध यह शहर उत्तराखंड का औद्योगिक केन्द्र भी

हरिद्वार। हरिद्वार के बिना उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना भी नहीं की जा सकती है, क्योंकि यह शहर अपनी धार्मिक और आध्यात्मिक वजहों से पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। यही कारण है कि यहां पर भारत के साथ-साथ अन्य देशों से भी श्रद्धालु घूमने आते हैं। वहीं, बात अगर साधु-संतों की करें तो देश के तमाम बड़े-बड़े हिन्दू धर्मगुरुओं के हरिद्वार में आश्रम और मठ हैं। इन मठों और आश्रमों में भक्तों का आना-जाना लगा रहता है। इससे हरिद्वार में पर्यटकों का बढ़ावा भी मिलता है। साथ ही इससे राजस्व में वृद्धि भी होती है।

कहा जाता है कि हरिद्वार एक बहुत ही प्राचीन शहर है। यह हिन्दुओं के सात पवित्र स्थलों में से एक है। खास बात यह है कि 3139 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अपने स्रोत गोमुख से गंगा नदी पहड़ों से होते हुए सबसे पहले हरिद्वार में ही समतल पर आती है। इसलिए हरिद्वार को ‘गंगाद्वार’ के नाम से भी जाना जाता है। जिसका अर्थ होता है, वह स्थान जहां पर गंगाजी मैदानों में प्रवेश करती हैं। वहीं, हरिद्वार का अर्थ “हरि (ईश्वर) का द्वार” होता है।

उत्तराखंड का प्रवेश द्वार है हरिद्वार
यदि हरिद्वार जिले की बात करें तो जनपद को राज्य का प्रवेश द्वार माना गया है। इस जिले के उत्तर में देहरादून जिला, पूर्व में पौड़ी गढ़वाल जिला, पश्चिम में उत्तर प्रदेश का सहारनपुर जिला तथा दक्षिण में मुजफ्फरनगर तथा बिजनौर जिले हैं। हरिद्वार का कुल छेत्रफल 2360 किलोमीटर (910 वर्गमील) है। तथा समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 249।7 मीटर (819।2 फीट) है। हरिद्वार जिले की स्थापना 28 दिसंबर 1988 को हुई है। इसके बाद 9 नवंबर 2000 को हरिद्वार नवगठित उत्तराखण्ड राज्य का हिस्सा बन गया। साल 2011 के जनगणना के अनुसार, हरिद्वार की जनसंख्या 1890422 है। इस जनसंख्या के साथ ही यह उत्तराखण्ड का सबसे अधिक जनसंख्या वाला जिला बन गया है।

हर 12 साल पर महाकुंभ का आयोजन होता है
धार्मिक दृष्टि से देखें तो हरिद्वार पूरी दुनिया में विख्यात है। यहां स्थित हरकी पौड़ी पर हर वर्ष लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान करने पहुंचते हैं। वहीं, प्रत्येक बारह वर्ष में यहां महाकुम्भ का आयोजन होता है। इसके साथ ही सनातन परंपरा का यह प्रमुख केंद्र भी है। इस परंपरा से जुड़े सभी अखाड़ों के आश्रम यहां पर मौजूद हैं। वहीं, इस नगर को सिद्धपीठों व शक्तिपीठों की भूमि के रूप में भी जाना जाता है। शिवालिक पर्वतमाला पर स्थित मा मनसा देवी, नील पर्वत पर विराजमान मा चंडी देवी और अंजनी माता की ख्याति के बारे में कौन नहीं जानता। वहीं, नीलेश्वर महादेव के अलावा हरिद्वार के हृदय स्थल में मा माया देवी व सुरेश्वरि देवी के मंदिर सभी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र हैं। साथ ही यावन्ही नील धारा तट पर स्थित मा दक्षिण काली का मंदिर को अध्यात्म का गढ़ माना जाता है।

हरिद्वार में कोई भी हवाई अड्डा नहीं है
वहीं, बात यदि यातायात की करें तो हरिद्वार में कोई भी हवाई अड्डा नहीं है। हालांकि, लक्सर और शिकारपुर में दो हेलिपैड साइटें प्रस्तावित हैं। मुख्यालय हरिद्वार से लगभग 52 किलोमीटर दूर देहरादून में स्थित जॉली ग्राण्ट विमानक्षेत्र निकटतम हवाई अड्डा है। जॉली ग्राण्ट से स्पाइस जेट, इंडिगो तथा जेट एयरवेज की उड़ानों द्वारा दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु सहित अन्य महत्वपूर्ण नगरों में जाया जा सकता है। दिल्ली में स्थित इंदिरा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र हरिद्वार से निकटतम अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है।

हरिद्वार जिले में कुल 13 रेलवे स्टेशन हैं

हरिद्वार जिले में कुल 13 रेलवे स्टेशन हैं, जिनमें से 6 स्टेशन ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। सभी स्टेशन भारतीय रेलवे के उत्तरी जोन के मुरादाबाद मण्डल के अंतर्गत आते हैं। जिले से होकर जाने वाली रेलवे लाइन की कुल लंबाई 72 किलोमीटर है। हरिद्वार जंक्शन जिले का प्रमुख रेलवे स्टेशन है। इसके अलावा लक्सर और रुड़की में भी महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शन हैं।

हरिद्वार जिले में 11 विधानसभा सीटें हैं
उत्तराखण्ड का कोई भी राजमार्ग हरिद्वार से नहीं गुजरता है। जिले में यातायात के प्रमुख साधन राज्य सड़क परिवहन निगम की बसें, निजी बसें, टैक्सी, जीप, और ट्रक आदि हैं। उत्तराखंड की राजनैतिक दृष्टि से हरिद्वार बहुत महत्वपूर्ण है। हरिद्वार जिले में 11 विधानसभा सीटें हैं। हरिद्वार नगर विधानसभा से विधायक मदन कौशिक राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और राज्य सरकार के प्रवक्ता भी हैं। हरिद्वार लोकसभा उत्तराखंड की सबसे बड़ी लोकसभा है। इस लोकसभा में 14 विधानसभा सीटें आती हैं। 11 विधानसभा हरिद्वार जिले की और 3 विधानसभा सीटें देहरादून की शामिल हैं।

प्रमुख औद्योगिक केन्द्र के रूप में भी पहचान मिली है
अब हरिद्वार को धार्मिक महत्त्व के अलावा राज्य के एक प्रमुख औद्योगिक केन्द्र के रूप में भी पहचान मिली है। यह शहर तेजी से विकसित हो रहा है। तेजी से विकसित होता औद्योगिक एस्टेट, राज्य ढांचागत और औद्योगिक विकास निगम, SIDCUL (सिडकुल), भेल (भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड) और इसके सम्बंधित सहायक इस नगर के विकास के साक्ष्य हैं। साथ ही पतंजलि का मुख्यालय भी हरिद्वार में ही है।

Source link

Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *