एक ‘हां’ के पीछे ढेर सारी ‘ना’ होती हैं – चित्रांगदा सिंह

चित्रांगदा सिंह ने करियर की शुरूआत सुधीर मिश्रा द्वारा निर्देशित ’हजारों ख्वाहिशें ऐसी’ (2003) जैसी आॅफबीट फिल्म के साथ की थी। फिल्मों में आने से पहले वह एक माॅडल के रूप में विख्यात थीं। इरफान खान के साथ ’कल यस्टरडे एंड टुमारो’(2005) उनके करियर की दूसरी फिल्म थी। उसके बाद ’सौरी भाई’ (2008) और ’बसरा’ (2010) जैसी फिल्मों में वह नजर आईं।
चित्रांगदा सिंह बेहद खूबसूरत हैं। ’देसी बाॅयज’ (2011) के बाद उनके ढेर सारे प्रशंसक बन गये थे जिन्हें उनसे काफी अधिक उम्मीद हो उठी थीं लेकिन बार बार उनके इंडस्ट्री में आने-जाने के कारण वो उम्मीदें पूरी नहीं हो सकी। चित्रांगदा सिंह अब तक इतने ज्यादा कमबैक कर चुकी हैं कि लोग उन्हें ’कमबैक क्वीन’ तक कहने लगे हैं। चित्रांगदा एक बार फिर से पूरे जोश के साथ मायानगरी में लौट आईं हैं और और मुंबई में बाॅबी देओल के फ्लैट में किराये पर रह रही हैं।
हमेशा फिल्मों में कुछ अलग करने वाली चित्रांगदा ने हाल ही में प्रदर्शित, ’साहेब बीवी और गैंगस्टर 3’ में एक बार फिर से अपनी बोल्ड अदाओं का जादू दर्शकों पर चलाया है। इसे उनका एक और बड़ा कमबैक माना जा रहा है। तिग्मांशु धूलिया की इस फिल्म में चित्रांगदा सिंह ने प्यार के लिए सब कुछ करने वाली लड़की का रोल निभाया है। इसमें उन्होंने 1964 में आई ’वो कौन थी’ में साधना पर फिल्माये गये गीत, ’लग जा गले……….के स्पेशल रिक्रिएशन साॅंग में जबर्दस्त परफारमेंस दी है जिसे काफी पसंद किया जा रहा है।
2018, चित्रांगदा के करियर के लिए इसलिए भी खास रहा कि इस साल, उनके द्वारा निर्मित पहली हिंदी फिल्म ’सूरमा’ रिलीज हुई। दिलजीत दोसांझ और तापसी पन्नू अभिनीत इस फिल्म को दर्शकों से मिले रिस्पांस से चित्रांगदा बेहद खुश हैं।
चित्रांगदा सिंह की आने वाली फिल्मों में ’बाजार’ काफी महत्त्वपूर्ण है। इसमें वो सैफ अली खान के साथ लीड रोल निभा रही हैं। प्रस्तुत हैं, चित्रांगदा सिंह के साथ की गई बातचीत के मुख्य अंशः

’सूरमा’ के साथ बतौर प्रोडयूसर जुड़ने का सिलसिला कब और कैसे शुरू हुआ ?
तीन साल पहले जब मेरे पास कोई काम नहीं था और जिंदगी में कुछ अच्छा नहीं हो रहा था, तब मेरी मुलाकात मशहूर हाॅकी प्लेयर संदीप सिंह से हुई। उनसे मिलने पर मुझे पता चला कि गोली लगने से पेरेलाइज्ड हो जाने के बाद किस तरह कोई कमबैक करते हुए देश को मैडल दिलवा सकता है। मुझे लगा कि संदीप सिंह की जिंदगी को सिल्वर स्क्रीन पर दिखाया जाना चाहिए।

’सूरमा’ का सफर आपके लिए कितना आसान या मुश्किल रहा ?
यह सफर मेरे लिए बिलकुल भी आसान नहीं रहा। मैं जिस भी प्रोडक्शन हाउस के पास संदीप सिंह की स्क्रिप्ट लेकर जाती, सब मुझसे यही कहते हाॅकी प्लेयर पर बायोपिक नहीं चलेगी। फाइनली ’सोनी पिक्चर्स बोर्ड पर आए और हमने ’सूरमा’ शुरू की।

’सूरमा’ को लेकर आप खुद कितनी संशय में थीं ?
दरअसल, हम सभी अपने जीवन में जी तोड़ मेहनत करते हैं पर हरदम एक आशंका सी रहती है कि सफलता मिलेगी या नहीं ? उसी दरम्यान कई बार रिजेक्शन भी मिलते हैं। उनके कारण भरोसा डगमगाने लगता है। ऐसे में जब हमारी मनचाही मुराद पूरी होती है, तब हमें अपनी ही कोशिश किसी चमत्कार जैसी लगने लगती है। सरल शब्दों में कहें तो एक ’हां’ के पीछे ढेर सारी ’ना’ होती हैं।

’सूरमा’ में जो किरदार तापसी पन्नू ने निभाया, उसे आप भी कर सकती थीं। उसके लिए आपने तापसी को क्यों चुना ?
यदि मैं ’सूरमा’ करती तो मुझे ज्यादा खुशी होती लेकिन मैं खुद को धोखा नहीं दे सकती थी। मुझे पता था कि किस किरदार के लिए कौन सा कलाकार, फिट बैठेगा। मुझे शुरू से लगता था कि तापसी सबसे ज्यादा परफेक्ट रहेगी। छोटे शहर वाले चार्म के अलावा तापसी की फिजिक इस तरह की है कि वह किसी स्पोर्ट पर्सन की तरह नजर आती हैं।

’साहेब बीवी और गैंगस्टर 3’ में आपने लीड रोल निभाया। फिल्म में आप पूरी तरह चुस्त दुरूस्त नजर आ रही हैं। आखिर 41 की उम्र में भी 24 की लगने का राज क्या है ?
वर्क आउट और डाइट। रामनगर वाले अपनी लड़कियों को किस चक्की का आटा खिलाते हैं, यह महत्त्वपूर्ण नहीं है। महत्त्वपूर्ण यह है कि वह आटा एक लिमिट में रहकर खाती हैं या आउट आॅफ लिमिट ? मैं फूडी नहीं हूं। अपनी डाइट को मैंने हमेशा मेनटेन रखा है। इसके अलावा इसका नेचुरल क्रेडिट मैं अपने पेरेंट्स को दूंगी क्योंकि उनकी फिजिक मुझे जेनिटिकली मिली है। हम विजुअल मीडियम में काम करते हैं, लिहाजा निरंतर फिट दिखना हमारी जिम्मेदारी है।

संजय दत्त के साथ काम करने का एक्सपीरियंस कैसा रहा ?
बेहतरीन! उनके साथ काम करते हुए किसी तरह का टेेंशन नहीं रहा। वह नम्र स्वभाव वाले बेहद अच्छे इंसान हैं। सामने वाले को सहज बनाने में वह पूरा सहयोग करते हैं। उनके साथ काम करने के लिए मैं बहुत एक्साइटेड थी लेकिन मन में थोड़ी हिचक भी थी। उनके साथ काम करना सचमुच मेरे लिए बहुत बेहतरीन रहा।

तिग्मांशु धुलिया के साथ एक बार जो भी काम करता है, उनका मुरीद होकर रह जाता है। आप उनकी कितनी मुरीद हुईं ?
उनकी फिल्मों के डाॅयलोग और किरदारों की एक अलग दुनिया होती है। ’साहेब बीवी और गैंगस्टर 3’ में मैंने संजय दत्त से प्यार करने वाली लड़की का किरदार निभाया है लेकिन किसी कारणवश हम मिल नहीं पाते । इस फिल्म में मुझ पर फिल्माये गये स्पेशल साॅंग के साथ मेरे एक डाॅयलाग, ’सूरज और चांद कभी मिल नहीं पाते, जब भी मिलने की कोशिश करते हैं तो ग्रहण लग जाता है’, की खूब चर्चा हो रही है।

आपकी ’हजारों ख्वाहिशें ऐसी’ और ’इन्कार’ जैसी फिल्मों को उस वक्त अच्छा रिस्पाॅंस नहीं मिला था जबकि आज के दौर में उसी तरह की ’राजी’ और ’वीरे दी वेडिंग’ जैसी फिल्में अच्छा बिजनेस कर रही हैं ?
’हजारो ख्वाहिशें ऐसी’ एक टाइम अहेड फिल्म थी जो आज ज्यादा रिलेवेंट है। ’इन्कार’ के दौरान हर किसी ने डायरेक्टर सुधीर मिश्रा को यही सलाह दी थी कि माया वाला किरदार, ज्यादा स्ट्राॅंग नहीं होना चाहिए पर उन्होंने, उसे स्ट्राॅंग रखा और लोग सही और सुधीर सर गलत साबित हुए। ’इन्कार’ यदि आज रिलीज होती तो यकीनन अच्छा बिजनेस करती।

आपसे आपके फैंस को एक बड़ी शिकायत है कि आप बार बार इंडस्ट्री छोड़कर चली जाती हैं ?
मेरी जिंदगी काफी उथल पुथल भरी रही है। मेरे साथ कुछ ऐसी घटनाएं हुई जिन्हें सुलझाने के लिए मुझे कुछ वक्त चाहिए था। न चाहते हुए मुझे लंबे लंबे ब्रेक पर जाना पड़ा। मेरी सारी प्राथमिकताएं बदल चुकी थीं। अभी भी मेरी जिंदगी की कुछ प्राॅब्लम्स अनसुलझी हैं लेकिन मुझे यकीन है कि, मैं जल्द उन्हंे सैटल कर लूंगी। फैंस की नाराजगी को मैं समझती हूं। उनकी शिकायत वाजिब है। मैं उनकी आभारी हूं कि उनका प्यार मुझे लगातार मिलता रहा है। जितना भी काम मैंने अब तक किया है, उसे उन्होंने पसंद किया है। उम्मीद करती हूं कि आगे भी इसी तरह का प्यार मुझे मिलता रहेगा।

’बाजार’ किस तरह की फिल्म है?
यह स्टाॅक मार्केट पर आधारित है। मार्केट के अप्स एंड डाउन के इर्द गिर्द इसकी कहानी बुनी गई है। इसमें मैं सैफ अली खान के अपोजिट मेन लीड में हूं।

-सुभाष शिरढोनकर-

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