उत्तराखंड सरकार क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (सीएयू) के विवादों की कराएगी जाँच, खेल मंत्री ने सदन में दिया आश्वासन

भराड़ीसैंण । उत्तराखंड सरकार क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (सीएयू) के विवादों की जांच कराएगी। खेल व युवा कल्याण मंत्री अरविंद पांडेय ने शुक्रवार को सदन में यह आश्वासन दिया। कांग्रेस विधायक करन माहरा ने शून्यकाल में कार्यस्थगन प्रस्ताव के तहत यह मामला उठाया और सरकार ने इस मामले में कार्रवाई की मांग की।

माहरा ने कहा कि सीएयू का विवाद देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। इससे उत्तराखंड का नाम बदनाम हो रहा है। बड़े नेताओं के संरक्षण में सीएयू में मनमानी हो रही है। विवाद के कारण वसीम जाफर को कोच पद से इस्तीफा देना पड़ा। उन्होंने खिलाड़ियों के चयन की प्रक्रिया विवादों के घेरे में है। अयोग्य लोगों का चयन किया गया। अंडर-23 में शानदार प्रदर्शन करने वाली निष्ठा मिश्रा को चयन सूची से इसलिए बाहर कर दिया गया कि वह 17 साल की थी। नियम के विपरीत सरकारी अधिकारी को एसोसिएशन का पदाधिकारी बनाया गया है। उन्होंने इन तमाम गड़बड़ियों व विवादों की जांच की मांग की।

खेल मंत्री अरविंद पांडेय ने कहा कि राज्य को बने 21 साल हो गए। 18 साल तक क्रिकेट एसोसिएशन की बीसीसीआई से मान्यता नहीं मिल पाई। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और उनके प्रयासों से मान्यता मिली। उन्होंने सदन में सचिव स्तर की कमेटी बनाकर समस्त प्रकरणों की जांच की घोषणा की। बाद में उन्होंने कहा कि सीएयू एक स्वायत्तशासी संस्था है। इसलिए कमेटी यह निर्धारित करेगी वहां बीसीसीआई के मानकों को पूरा किया जाए।

ये था पूरा मामला

उत्तराखंड क्रिकेट संघ के अधिकारियों ने जाफर पर उत्तराखंड के कोच के कार्यकाल के दौरान धर्म आधारित चयन को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था है। हालांकि, उन्होंने (जाफर) संघ के अधिकारियों के इन आरोपों को खारिज कर दिया। जाफर ने चयन में दखल और चयनकर्ताओं और संघ के सचिव के पक्षपातपूर्ण रवैये को लेकर बीते मंगलवार को इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद जाफर ने ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था, ‘जो कम्युनल एंगल लगाया, वह बहुत दुखद है। उन्होंने आरोप लगाया कि मैं इकबाल अब्दुल्ला का समर्थन करता हूं और उसे कप्तान बनाना चाहता था जो सरासर गलत है।’

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