खतरे में है गधों का अस्तित्व, तेजी से घट रही है इनकी संख्या, आखिर क्यूँ ?

न्यूज़ डेस्क |

दुनियाभर में कुछ ऐसे जानवर हैं, जिनकी संख्या लगातार घटती जा रही है। विलुप्त हो रहे जानवरों की सूची में अब गधे भी शामिल हो गये हैं। आंकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो अभी दुनिया में लगभग 4.4 करोड़ गधे बचे हैं। गिरते हुए आंकड़ों के अनुसार बताया जा रहा है कि आने वाले कुछ सालों में इनकी संख्या आधी हो सकती है। इसके पीछे एक बहुत बड़ा कारण छिपा है।

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जानवरों के अस्तित्व को बचाने के लिए कार्य कर रही एक संस्था ‘डंकी सेंक्चुअरी’ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, गधों के अंगों तथा प्रत्यंगों से चीन में हर साल दवाइयों का निर्माण किया जाता है। इस निर्माण में लगभग 48 लाख गधों की जान जाती है। चीन में इस उद्योग को ‘इजियाओ’ नाम दिया गया है। इस उद्योग के लिए चीन हर साल बहुत बड़ी मात्रा में गधों का आयात करता है। ये आयत एक देश से नहीं बल्कि बहुत सारे देशों से होता है।

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गधों की घटती जनसँख्या के और भी हैं कारण –

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चीन के अलावा दुनिया भर में इनके चमड़े का व्यापार भी काफी मशहूर है। रिपोर्ट के अनुसार पता चला है की पुराने समय में गधे कई सारे स्थानों पर लोगों की आजीविका का साधन हुआ करता था। कई सारे परिवार कमाई के लिए केवल इस एक अकेले जानवर के ऊपर निर्भर थे। इसके बाद जब इंसान की जरूरतें बढ़ने लगी तो गधों के व्यापार में भी बढ़ोत्तरी होने लगी।

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इसके अलावा लोगों ने ज्यादा मुनाफ़ा कमाने के लिए गधों की तश्करी करना शुरू कर दिया। कहा जाता है की तश्करी के दौरान इन जानवरों को कुछ खाने पीने के लिए नहीं दिया जाता था, जिसके कारण 20 प्रतिशत गधे रस्ते में ही दम तोड़ देते थे। रिपोर्ट्स के अनुसार इन जानवरों की संख्या में गिरावट तभी से आने लगी थी। लेकिन अब तश्करी, चमडा व्यापार तथा चीन की पौराणिक दवाइयों के कारण गधों की संख्या में हो रही गिरावट में बहुत तेजी आने लगी है। साथ ही विशेषज्ञों का कहना है की यदि गिरावट इसी गति से होती रही तो आने वाले समय में गधों का विलुप्त होना निश्चित है।

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