उत्तराखंड की आधुनिक शिक्षा का कड़वा सच

जैसा कि सर्व विधित है कि आज का युग computer युग है, कोई भी कार्य बगैर computer के सोचना और करना असंभव है, भारत डिजिटल इंडिया की ओर अग्रसर है, करोडो रूपये इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी के लिए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम में पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, भारत के अधिकतर वे राज्य जो विकसित राज्यों की कतार में आते हैं, वहां ना केवल computer infrastructure पर बल दिया गया है अपितु computer एजुकेशन को भी सरकारी हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट स्तर से लेकर स्नातक और परास्नातक स्तर तक विस्तारित किया गया है। गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, नई दिल्ली, महारास्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश जैसे राज्य विकाशशील से विकसित ही इस कारण हो पाए क्यूंकि इन राज्यों ने computer को न केवल इन्फ्रास्ट्रक्चर स्तर से प्रारंभ किया अपितु computer को एक विषय के तौर पर सरकारी हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट स्तर से लेकर स्नातक और परास्नातक स्तर तक लागू किया है। मेरा राज्य उत्तराखंड जिसको बनाये हुए 18 वर्ष से ज्यादा हो गया है, लेकिन अभी भी जो विकाशशील की श्रेणी में ही आता है , उत्तराखंड राज्य के विकाशशील की श्रेणी में रहने का एक प्रमुख कारण यह भी है कि उत्तराखंड में योग, उर्दू, संस्कृत, गृह विज्ञान, शारीरिक शिक्षा, पुस्तक कला आदि आदि कई विषयों को तो हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट स्तर से लेकर स्नातक और परास्नातक स्तर तक लागू किया गया है किन्तु आधुनिकता का ब्रह्मास्थ computer विज्ञान को अभी तक भी एक विषय के तौर पर सरकारी प्राइमरी, जूनियर, सेकेंडरी, हाई स्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक, परास्नातक स्तर पर लागू नहीं किया गया है।

भारत के अधिकतर विकसित एवं विकासशील, केंद्र शाषित राज्यों लगभग २४ राज्यों (गुजरात / राजस्थान / मध्य प्रदेश / हरियाणा / आन्ध्र प्रदेश / केरल / उत्तर प्रदेश/ पणजी/ अंडमान निकोबार / चंडीगड़/ गोवा / नई दिल्ली / नार्थ ईस्ट के सभी 7 हिमालयी राज्य आदि ) में Computer Science अनिवार्य/नियमित विषय के रूप में स्थापित है किन्तु 18 वर्ष बीत जाने के उपरांत भी उत्तराखंड में इस विषय को अनिवार्य/नियमित विषय के रूप में मान्यता नहीं दी गई है.ऐसा भेदभाव उत्तराखंड से क्यूँ हो रहा है ?

सर्वविधित है कि आज के समय में Computer की उपयोगिता सर्वागीण क्षेत्र में है, चाहे वह ऑफिस हो या घर हो या चुनाव या कोई भी क्रांति ही क्यों ना हो. लेकिन इतना महत्वपूर्ण विषय होने के बावजूद भी Computer Science अभी तक उत्तराखंड के सरकारी हाईस्कूल/इंटरमीडिएट कॉलेजों में अनिवार्य/नियमित विषय के रूप में स्थापित नहीं किया गया है, जबकि शारीरिक शिक्षा, गृह विज्ञान, पुस्तक कला , ड्राइंग एंड पेंटिंग , उर्दू , संस्कृत , योग, वेद, संगीत एवं कला जैसे कई अन्यान्य विषयों को उत्तराखंड के सरकारी हाई स्कूल/इंटरमीडिएट कॉलेजों में अनिवार्य/नियमित विषय के रूप में स्थापित किया गया है, किन्तु Computer Science जैसे अतिमहत्वपूर्ण विषय को उत्तराखंड के सरकारी हाईस्कूल/इंटरमीडिएट स्तर के कॉलेजों में अनिवार्य/नियमित विषय के रूप में स्थापित नहीं किया गया है, Computer Science जैसे अतिमहत्वपूर्ण विषय के साथ ऐसा सोतेला व्यवहार क्यूँ किया जा रहा है। आपसे हमारी यह विनती है कि Computer Science विषय को नियमित विषय के रूप में मान्यता देते हुए स्थाई पदों की स्वीकृति प्रदान की जाय।

उत्तराखंड की अधिकाँश जनता लोअर मिडिल क्लास/गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करती है, जब उस गरीब वर्ग के पास दो जून की रोटी की व्यवस्था करना ही एक टेडी खीर है तो वह व्यक्ति कहाँ से किसी प्राइवेट संस्थान से लाखों रूपया खर्च करके Computer शिक्षा ग्रहण कर पायेगा ? किन्तु अगर उत्तराखंड सरकार द्वारा Computer Science विषय को हाईस्कूल/इंटरमीडिएट विद्यालयों में अनिवार्य/ नियमित विषय के रूप स्थापित किया जाएगा तो मध्यमवर्गीय/गरीब का बच्चा भी Computer Science जैसा आधुनिक विषय की पढाई निःशुल्क कर पायेगा, जो सही मायनों में गरीब/मध्यम वर्ग की सच्ची सेवा होगी. अगर Computer Science विषय को अनिवार्य/नियमित विषय के रूप में मान्यता प्रदान की जाती है तो, उत्तराखंड के सरकारी हाईस्कूल/इंटरमीडिएट विद्यालयों में लगातार कम हो रही छात्र संख्या में रोक लगेगी और निश्चित ही छात्र संख्या बढेगी।

उत्तराखंड से प्रतिवर्ष 35000 छात्र केवल Computer Science विषय से BCA / MCA / B. Tech (CS / IT) /M.Tech (CS / IT) / B. Sc (CS / IT) / M. Sc (CS / IT) /PGDCA/PGDIT आदि की डिग्री/डिप्लोमा/परास्नातक/सर्टिफिकेट कोर्स करके निकल रहा है, जिनकी पिछले 18 वर्षों में संख्या लगभग 9 लाख हो चुकी है, किंतु सरकार इनके लिए कोई भी रोजगार की व्यवस्था नही कर पा रही है. अगर Computer Science विषय को उत्तराखंड के सरकारी हाईस्कूल/इंटरमीडिएट विद्यालयों में नियमित/अनिवार्य विषय के रूप में मान्यता मिलती है तो भारत के यशस्वी प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी जी के Dream Project ” Digital India / कौशल विकास ” कार्यक्रम को भी एक बहुत मजबूत आधार मिलेगा।

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वर्तमान में उत्तराखंड के सभी सरकारी विद्यालयों में इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर Computer कक्ष / 6 Computer Set/ 1 Printer सेट / 1 Scanner सेट / 1 प्रोजेक्टर सेट रखे गए हैं. जहाँ बिजली नहीं है वहां जेनरेटर सेट तक रखे गए हैं जिनके लिए प्रतिमाह 30 लीटर डीज़ल की भी व्यवस्था की गयी है, छात्र हैं, इंफ्रास्ट्रक्चर है, किन्तु उसको पढ़ाने और समझाने के लिए Computer प्रशिक्षित नियमित अध्यापकों की कोई भी व्यवस्था नहीं होने के कारण समस्त Computer उपकरण धूल खा रहे हैं या खराब हो चुके हैं, कई वर्षों से कहा जाता है कि “पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी” पहाड़ के काम नहीं आ पाता है, कैसे आएगा ? जब उनके लिए कोई रोजगार की व्यवस्था ही सरकार के द्वारा नही की जा रही है, जबकि अगर उत्तराखंड के कंप्यूटर प्रशिक्षित बेरोजगारों की बात की जाय तो ये संख्या 35000 प्रतिवर्ष है जो कि पिछले 18 वर्षों में 9 लाख हो चुकी है।

हम सभी नवयुवकों को समझ में नहीं आ रहा है कि सरकारी अध्यापकों की सेवानिवृति की उम्र 58 से बढ़ाकर 65 तक कर दी गई है , तथा भविष्य में 65 से भी बढ़ाकर 70 वर्ष की जाने वाली है जबकि दूसरी तरफ 85% नवयुवकों वाले उत्तराखंड राज्य में 9 लाख नवयुवकों ने लाखों रूपये का क़र्ज़ लेकर Computer की दक्षता डिग्री के रूप में ली हुई है , और उन 9 लाख नवयुवकों के लिए सरकारी स्तर पर खाशतौर से विद्यालयों में स्थाई Computer Science के पद सृजित नहीं किये गए हैं, परिणाम स्वरुप हमारे अभिभावकों में भी सरकार के प्रति रोष व्यापत हो रहा है।

स्थाई Computer Science प्रशिक्षित अध्यापकों की नियुक्ति न होने के कारण उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के वार्षिक बोर्ड मूल्यांकन में देखा गया कि इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी की 3000 कापियों को भोतिक विज्ञान के अध्यापकों के द्वारा मूल्यांकित करवाया गया, जबकि एजुकेशनल मैन्युअल के नियमानुसार हाईस्कूल/इंटरमीडिएट की कापियों को संभंधित विषय का ही स्नातक/परास्नातक अध्यापक ही जाँचने के लिए सक्षम माना जाता है।

वर्तमान में फिजिक्स / केमिस्ट्री / मैथमेटिक्स वाले अध्यापकों को 15 दिन का Computer प्रशिक्षण देकर उनसे Computer Science विषय पढाने के लिए कहा जाता है जो कि सरकारी धन का दुरुपयोग मात्र है, जिसके परिणाम स्वरुप फिजिक्स / केमिस्ट्री / मैथमेटिक्स वाले अध्यापक ना तो अपना मूल विषय पढा पा रहा है और Computer विज्ञान विषय की तो उनमें समझ तक नहीं आ पाती है, जिससे संभंधित विद्यालय में पढने वाले छात्रों का नुक्सान हो रहा है, जिसके परिणाम स्वरुप सरकारी विद्यालयों में लगातार छात्र संख्या घट रही है, जबकि दूसरी ओर उत्तराखंड में 9 लाख प्रशिक्षित Computer ग्रेजुएट बेरोजगार घूम रहे हैं।

राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत अधिकारियों / कर्मचारियों को समय-2 पर Computer प्रशिक्षण देने में वाह्य एजेंसियों को सरकारी व्यय पर अनुभंधित किया जाता है, जबकि यही कार्य हाईस्कूल/इंटरमीडिएट स्थाई Computer Science अध्यापकों के द्वारा निःशुल्क लिया जा सकता है। जिससे उत्तराखंड सरकार के धन की भी बचत होगी। Computer Science के स्नातक/परास्नातक Computer Science विषय के अतिरिक्त हाईस्कूल / इंटरमीडिएट कक्षाओं के छात्रों को इंग्लिश/गणित आदि विषय पढाने में भी सक्षम होते हैं, जिससे कि उत्तराखंड के सुदूर स्थित विदयालयों में उपरोक्त विषयों के अध्यापकों की कमी को प्रशिक्षित Computer स्नातक/परास्नातकों की स्थाई नियुक्ति द्वारा पूरा किया जा सकता है।

उत्तराखंड के समस्त ब्लॉकों में स्थित हाईस्कूल/इंटरमीडिएट विद्यालयों में Computer Science की सुसज्जित प्रयोगशाला अत्याधुनिक उपकरणों के साथ बनाई गई हैं, किन्तु स्थाई प्रशिक्षित Computer स्नातक/परास्नातक अध्यापकों के अभाव के कारण समस्त Computer उपकरण धूल खा रहे हैं या खराब हो चुके हैं। भारत के अधिकतर विकसित एवं विकासशील राज्यों (गुजरात / राजस्थान / मध्य प्रदेश / हरियाणा / आन्ध्र प्रदेश / केरल / उत्तर प्रदेश / गोवा / नई दिल्ली / नार्थ ईस्ट के सभी 7 हिमालयी राज्य आदि ) में Computer Science अनिवार्य/नियमित विषय के रूप में स्थापित है किन्तु 18 वर्ष बीत जाने के उपरांत भी उत्तराखंड में इस विषय को अनिवार्य/नियमित विषय के रूप में मान्यता नहीं दी गई है। ऐसा भेदभाव उत्तराखंड से क्यूँ हो रहा है ?

अत: आपसे विनम्र निवेदन है कि आप इस गम्भीर विषय को संज्ञान में लेते हुए द्रुत गति से उत्तराखंड के सरकारी हाईस्कूल/इंटरमीडिएट कॉलेजों में Computer Science विषय को अनिवार्य/नियमित विषय के रूप में स्थापित करेंगें एवं स्थाई पदों के पद सृजित करेंगें। जिससे उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहा पलायन रुकेगा और उत्तराखंड के पानी के साथ-2 उत्तराखंड की जवानी भी उत्तराखंड के विकास में उत्तराखंड को सहयोग कर सके, तभी सच्चे शब्दों में हो पायेगा सबका साथ, सबका विकास।

डॉ० पुनीत चन्द्र वर्मा
(BCA / MCA / M.Tech. ( CSE ) / Ph.D. (CS) / NET-JRF / USET )
समन्वयक, उत्तराखंड बेरोजगार computer संगठन
पुराना बाज़ार, पिथोरागढ़, उत्तराखंड

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