तालेश्वर और विंध्यवासिनी मंदिर से तालघाटी में पर्यटन स्थल बनने की अपार सम्भावनाये, तालघाटी झील बनने से क्षेत्र होगा पुनः गुलजार

यमकेश्वर प्रखण्ड में तालघाटी एक समय क्षेत्रीय लोगों से गुलजार रहती थी। 1951 में जब भारत आजाद हुआ था तब गॉव तो दूर शहर तक सड़कों और यातायात के लिए तरसते थे, उस जमाने में हरिद्वार से कण्डरह के लिए बसें चलती थी, लेकिन समय बदलता गया लोग पलायन करते गये, डांडामण्डल क्षेत्र और नीलकंठ काण्डी सड़क खुलने से यहॉ की रौनक ही खत्म हो गयी। आज यह तालघाटी बेवा की तरह विरान हो रखी है। ऐसा नहीं है कि तालघाटी विकास की पहल नहीं हो सकती है। आज मैं तालघाटी के विकास और उसके लिए क्या प्रयत्न किये जा सकते हैं इस पर अपनी कलम से शब्दों की महरम पट्टी लगाने का एक छोटा सा प्रयास कर रहा हॅू।

ताल घाटी के लिए जहॉ तालनदी अभिशाप रही है, वहीं कई मायनों में वरदान भी साबित होती है। आज तालघाटी में दो प्रसिद्ध मंदिर पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए तत्पर हैं, बस जरूरत है, एक स्थायी सड़क की । जहॉ एक ओर अस्थायी नदी की बीच गुजरती गढ्ढे नुमा सड़क एडवेंचर के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हैं, वहीं धारकोट जुलेड़ी मोटर मार्ग, नौंगांव बुकण्डी सड़क और काण्डाखाल खैराणा सडक यदि जनसहयोग और जन प्रतिनिधियों के द्वारा इसका निराकरण कर इनके निर्माण में मुख्य भूमिका निभाकर तालघाटी के दिन वापस लौटाया जा सकता है।
तालेश्वर महादेव मंदिर, और विन्ध्यवासनी मंदिर जहॉ एक और शिवभक्तों और माता के भक्तों के लिए आस्था का केन्द्र बनकर मंदिर पर्यटन के रूप में विकसित हो सकता है। इसके साथ ही तालघाटी में तिमली ग्राम सभा का तोक गा्रम घोरगड्डी में एक झरना है जो अभी क्षेत्रीय लोगों सहित पर्यटकों की नजर से बहुत दूर है, उसे विकसित किया जा सकता है। तालेश्वर महादेव मंदिर को पर्यटन स्िल बनाने के लिए स्थानीय लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। जिस स्थान पर मंदिर बना है, वहॉ पर दुकानें खोलकर, साथ ही अन्य सुविधायेंं उपलब्ध कराकर आय के साधन जुटाये जा सकते हैं। तालघाटी में बर्ड वाचिंग, जंगल पर्यटन, होम स्टे योजना, और कैम्पिंग व्यवसाय से यहॉ स्वरोजगार के कई आयाम खुल सकते हैं। तालघाटी में प्रस्तावित झील भी इसी योजना का एक महत्वपूर्ण अंग था। श्री महावीर प्रसाद कुकरेती जी ने जो योजना तालघाटी के लिए कल्पित की है, उसके पीछे उनका अपना अनुभव है।

तालघाटी में झील इसलिए प्रस्तावित की गयी है कि यहॉ एक तो पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, जिस जगह पर झील का सर्वेक्षण किया गया वहॉ पर सर्वेक्षण के अनुसार झील बनाने के लिए उपयुक्त स्थान था। तालघाटी सहित पूरे यमकेश्वर को पर्यटन माला के रूप में विकसित किया जा सकता है। उदाहरण के लिए नीलकंठ तक पर्यटक आता है, लेकिन वह वहीं से वापिस चला जाता है, जिस कारण वह यमकेश्वर के केवल नीलकंठ में ही अपना खर्च करता है, लेकिन उससे आगे उसके लिए पर्यटन के लिए कोई जगह नहीं होने के कारण वह वहीं से वापिस किसी दूसरी जगह की तलाश करता हैं। यदि तालघाटी में झील निर्मित हो जाती तो पर्यटकों को धारकोट जुलेड़ी मोटर मार्ग के रास्ते मॉ विन्ध्यवासनी के दर्शन करवाने के बाद, उन्हें तालेश्वर धाम के दर्शन और उसके बाद झील घूमाकर वापिस कांडाखाल के रास्ते तल्ला बनास, मल्ला बनास, के मंदिरों सहित डांडामण्डल में कालेश्वर महादेव, रामजीवाला का राम मंदिर, और फिर धारकोट का कोटेश्वर मंदिर, होते हुए मेदिनीपुरी के मंदिर के साथ अमोला का उग्रेश्वर मंदिर के दर्शन कर देवराना होते हुए यमकेश्वर मंदिर के दर्शन करवाकर उनकी इच्छानुसार विपस ़ऋषिकेश या फिर मालनघाटी होंते हुए कण्वनगरी के रास्ते कोटद्वार तक घुमाया जाता। लेकिन उक्त झील निर्माण की प्रक्रिया सरकारी दस्तावेजों में हमेशा की तरह सिमटकर रह गयी है, श्री कुकेरेती जी अवश्य प्रयासरत हैं, लेकिन स्थानीय जनता का सहयोग इसमें आवश्यक प्रतीत होता है, क्योंकि यह बहुउद्देशीय झील कई मायनों में क्षेत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होगी।

तालेश्वर महादेव में आगामी महाशिवरात्रि को मेले का आयोजन होना हे। जहॉ पहले धारकोट और यमकेश्वर में महाशिवरात्रि के दिन मेला का आयोजन होता है, लेकिन इन मेंलों पर पलायन का असर हुआ है, इस कारण लोग कम ही प्रतिभाग कर रहे हैं, पिछले दो सालों से तालेश्वर महादेव में जिस तरह मेले में लोगों की उत्सुकता नजर आ रही है, उसको यथावत बनाये रखना चुनौती अवश्य है लेकिन स्थानीय जनता और प्रवासी जनमानस ही इस मेले को और अधिक रोमांचक और रौनकयुक्त बनाने में अहम भूमिका अदा कर सकता है।
तालेश्वर मंदिर में भगवान भोलेनाथ गुप्त रूप में निवास करते हैं, स्थानीय लोगों की मान्यता है कि जो भी भोलेनाथ पर अटूट विश्वास के साथ इस मंदिर में मनौति मॉगता है तो उसकी मनौकामना अवश्य पूरी होती हे। तालेश्वर मंदिर में विदेशी पर्यटकों के साथ ही शिवभक्तों के लिए यह स्थान ध्यान लगाने के लिए उपयुक्त स्थान है। यहॉ पर योगा केन्द्र के माध्यम से भी प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित किया जा सकता है। इसी के साथ ही तालघाटी में कई स्थानों में पंजी जंम्पिंग के साथ ट्री क्लांबिंग कैम्पिंग व्यवसाय के साथ किया जा सकता हैं।

तालघाटी को विकसित करने के लिए धारकोट जुलेड़ी सड़क को साईकिलवाड़ी से तालेश्वर महादेव में आने वाली लिंक रोड़ काण्डाखाल -खैराणा मोटर मार्ग से जोड़ना, धारकोट जुलेड़ी जो बीच में 14 किलोमीटर शेष है उसका निर्माण शीघ्र होना एवं नौगावं बुकण्डी मार्ग को विध्यवासनी से जोड़ना नितान्त आवश्यक प्रतीत होता है, साथ ही प्रस्तावित तालघाटी झील के निर्माण हेतु स्थानीय लोगों को जनप्रतिनिधियों को बार बार अवगत कराना भी उतना ही जरूरी जितना कि विकास की उम्मीद रखना।

मैं अपनी कलम के माध्यम से क्षेत्रीय जनमानस और जनप्रतिनिधियों से अपील करता हॅू कि तालघाटी को पर्यटकों से गुलजार करने हेतु अपने अपने स्तर से प्रयास कर यमकेश्वर के विकास में भागीदार बनें।

हरीश कण्डवाल मनखी की कलम से

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