अयोध्या केस के ऊपर आज सुनाएगी अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली, एजेंसी |  सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को 70 साल से कानूनी लड़ाई में उलझे देश के सबसे चर्चित अयोध्या भूमि विवाद मामले में फैसला सुनाया। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, डीवाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एस अब्दुल नजीर की संविधान पीठ ने राजनैतिक, धार्मिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील इस मुकदमें की 40 दिन तक मैराथन सुनवाई करने के बाद गत 16 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। देश के संवेदनशील मामले में फैसले के मद्देनजर देशभर में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुख्‍य ढांचा इस्लामी संरचना नहीं थी। इसके बाद सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संदेह से परे है। इसके अध्ययन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। अदालत ने निर्मोही अखाड़ा के दावे को खारिज किया। निर्मोही अखाड़ा का दावा केवल प्रबंधन का है। निर्मोही अखाड़ा सेवादार नहीं है।साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बाबरी मस्जिद मीर बाकी द्वारा बनाई गई थी। इसके बाद गंगोई ने फैसला सुनाते हुए कहा कि हम 1946 के फैजाबाद कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली शिया वक्फ बोर्ड की सिंगल लीव पिटिशन (SLP) को खारिज करते हैं। वहीं SC का कहना है कि विवादित जमीन राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी जमीन थी।

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आपको यह भी बता दें कि पांच जजों की सुप्रीम कोर्ट की बेंच जल्द ही Ayodhya भूमि मामले में फैसला सुनाएगी। इसके लिए वरिष्ठ अधिवक्ता के. परासरन, सीएस वैद्यनाथन, राजीव धवन, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और मामले में विभिन्न पक्षों का प्रतिनिधित्व करने वाले अन्य वकील भी अदालत में पहुँच चुके हैं। इसके अलावा हाईलेवल सुरक्षा बैठक के लिए गृह सचिव अजय भल्ला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर पहुंच गये हैं। फैसले  के दौरान सुरक्षा के लिए कड़ा इंतजाम किया गया है, क्यूंकि सभी को पता है की फैसले के बाद कोई सी भी घटना घट सकती है, दंगे फसाद हो सकते हैं। इसके लिए सरकार अपनी तरफ से पहले से तत्पर है। हमारा मानना तो यह है की जनता को भी इसके लिए सचेत रहना होगा, क्यूंकि दंगे तो कोई और करते हैं  लेकिन घटनाएं अक्सर बेक़सूर लोगों के साथ हो जाती हैं।

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