सपा के साथ मिलकर भाजपा को हराना संभव नहीं – मायावती का ट्वीट

लोकसभा चुनावी नतीजों के बाद सपा और बसपा के बीच दूरियां बढ़ती ही जा रही है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने आज लगातार तीन ट्वीट करके सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि बसपा ने प्रदेश में सपा सरकार के दौरान दलित विरोधी फैसलों को दरकिनार कर देशहित में गठबंधन धर्म पूरी तरह से निभाया। लेकिन चुनावी नतीजों के बाद से सपा का बर्ताव उन्हें सोचने पर मजबूर करता है कि सपा के साथ आगे चुनाव लड़कर भाजपा को हराना संभव नहीं है। 4 जून को भी बसपा सुप्रीमो सपा के साथ गठबंधन तोड़ने की बात कह चुकी हैं।

मायावती ने ट्वीट किया कि जगजाहिर है कि हमने सपा के साथ गठबंधन के लिए सभी पुराने गिले-शिकवों को भुलाया। उनकी सरकार में 2012-17 के दौरान हुए बसपा और दलित विरोधी फैसलों और बिगड़ी कानून व्यवस्था को दरकिनार करके देशहित में सपा के साथ गठबंधन धर्म को पूरी तरह निभाया।

Related imageबसपा सुप्रिमों ने कहा कि आमचुनाव के बाद से सपा का व्यवहार सोचने पर मजबूर करता है कि क्या ऐसा करके भाजपा को आगे हरा पाना संभव होगा ? जो संभव नहीं है। इसलिए पार्टी और आंदोलन हित में बसपा अब आगे होने वाले सभी छोटे-बड़े चुनाव अकेले अपने बल-बूते ही लड़ेगी।

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बता दें कि मायावती ने 5 महीने बाद ही समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन तोड़ने का ऐलान संकेत देते हुए कहा था कि अखिलेश यादव अपनी पार्टी के हालात सुधारें। चुनाव में यादवों के वोट यानि सपा के बेस उन्हें नहीं मिले जिससे डिंपल यादव और उनके बड़े नेता चुनाव हारे और यह चिंता का विषय है।

12 जनवरी 2019 कोे सपा-बसपा ने गठबंधन करके साथ में लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। इसी तरह 1993 में भी दोनों दल एक साथ आए थे, उस समय बसपा प्रमुख स्व. कांशीराम थे। उस चुनाव में सपा 256 और बसपा 164 विधानभा सीटों पर लड़ी जिसमें सपा को 109 और बसपा को 67 सीटें मिली थीं। लेकिन 2 जून 1995 के गेस्ट हाउस कांड के बाद गठबंधन टूट गया था।
2019 लोकसभा चुनावों में बसपा और सपा ने 38 व 37 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। राहुल गांधी व सोनिया गांधी के लिए अमेठी व रायबरेली सीट पर गठबंधन ने उम्मीदवार नहीं उतारे थे। इसके अलावा मुजफ्फरनगर, मथुरा व बागपत सीट सपा ने अपने कोटे से रालोद के लिए छोड़ी थी। जिसमें बसपा ने 10 सीट जीती तो सपा को पांच सीटें मिली।

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