श्राद्ध – एक लघु कथा

आज मधु सुबह जल्दी उठ गई थी साथ मे उसके पति वीरेन भी उनके साथ ही उठ गया था। मधु ने जल्दी चाय बनाकर एक कप वीरेन को पकड़ायी और खुद भी बैड रूम में आकर दोनों चाय पीने लगे।। वीरेन ने कहा कि पंडित जी को तो कल ही फ़ोन कर दिया था कि सुबह जल्दी आ जाना। मुझे टाइम पर ऑफिस निकलना है। आज वीरेन के घर मे उनके पिताजी की श्राद्ध की तिथि थी। वीरेन के पापा दो साल पहले ही इस दुनिया से महाप्रयाण कर चुके थे। वीरेन ने कहा कि तुम तब तक नहा धोकर भोजन की व्यवस्था करो मैं दुकान से दूध दही ले आता हूँ, खीर बनाने के लिए। पीछे एक छोटे से कमरे में वीरेन की माँ यह सब सुन रही थी और वह चार साल पहले की स्मृति में खो गई। चार साल पहले एक दिन वीरेन के पिता ने बहु से कहा कि बेटा अब मुँह में दांत तो है नही, चपाती नही चबाई जाती है। मेरे लिए खीर बना दो मुझे बड़ी पसंद है और तुम्हारी सासु मा भी खा लेगी। यह सुनते ही बहु ने जबाब दिया कि ठीक है बाबू जी शाम को बना दूंगी आप तब तक हलवा ओर दाल खालो। शाम को ऑफिस से वीरेन घर आया तो मधु ने कहा कि दुकान से दूध ले आओ बाबू जी के लिए खीर बनानी है। यह सुनते ही नालायक वीरेन गुस्से में बोला कि खीर खाने के लिए चाहिए इन दोनों बुढ्ढो को, इस महगाई में दूध पहले ही 50 रुपये किलो हो गया है और ड्राईफ्रूट का तो इनकी उम्र से भी 10 गुना रेट है, कहाँ से आएगा इतना धन। करना धरना कुछ नही है और बैठे बैठे खीर चाहिए, यह वही वीरेन बोल रहा था जो कि माँ बाप के चार लड़की होने के बाद पैदा हुआ था और जिसके लिए मा बॉप ने पढाई लिखाई और हर इच्छाओ की पूर्ति अपने पेट को काटकर  उसकी हर ईच्छा पूर्ति की थी। अच्छी कम्पनी में जॉब लगने के बाद उसकी पसंद की हुई लड़की के साथ शादी कर दी थी। दोनों माँ बाप यह सब सुन रहे थे। माँ के आंखों में आँसू रोकने का नाम नही ले रहे थे जिसके लिये उन्होंने इतना कुछ किया आज वो एक खीर खाने के लिए इतना कह रहा है। उसके पिताजी ने अपनी पत्नी को झूठा दिलासा देते हुये कहा कि हो सकता है इसके पास अभी होगा नही तो कहाँ से लाएगा जबकि वह नामी कम्पनी में काम करता था उसके पास एक किलो दूध के लिए भी रुपये नही है इन्ही खयालो में डूबी माँ के सामने उसकी बहु मधु चाय लेकर आ गयी थी। मधु तो सास ससुर की खूब सेवा करना चाहती थी लेकिन वीरेन के व्यवहार को देखकर वह कर नही पाती थी।

मधु ने आज कई प्रकार के व्यंजन बनाए और वीरेन भी बाजार से सभी प्रकार के फल लेकर आया था, चाय चीनी दाल मिर्च ड्राई फ्रूट तक लेकर आया था आज उसके पिताजी का श्राद्ध जो था। पिताजी के जीतेजी तो उसने उनसे सीधे मुँह तक बात नही की और जो दिया होगा मधु ने छिपकर दिया होगा। मधु के माता पिताजी बचपन मे ही स्वर्ग सिधार गए थे तो उसने सास ससुर को ही माँ बाप समझती थी। मधु के अच्छे व्यवहार के कारण ही वो वहाँ रहते थे। मधु ने जब इतना सारा सामान देखा तो कहा कि आज ये सब किसके लिए लाए हो, वीरेन ने कहा कि आज पिताजी का श्राद्ध है तो दान करेगे पंडित जी को देगे गरीबो में बाटेंगे। यह सब मधु के साथ साथ उसकी माँ भी सुन रही थी। आज मधु से रहा नही गया और उसने वीरेन को प्यार से कहा कि ये सब करने की अब कोई जररूत नही है अब तो दो रोटी और खीर पंडित जी को खिला देगे वही बहुत है। जब तक ससुर जी जिंदा थे तब तक तो तुमने उनको कुछ नही दिया ओर अब जब वो पित्र हो गए है अब ये सब दे रहे हो। जब तक जिंदा रहे तो तुमने एक दिन खीर के लिए उनको सुना दिया कि वो सिसक सिसक कर रोते रहे और आपने उनके लिए खीर नही बनाने दी थी। आज माताजी के भी यही हाल है। सेवा करनी है और खिलाना पिलाना है तो ज़िन्दगी रहते खिलाओ मरने के बाद लोकदिखावा करके कोई फायदा नही। मधु की बात का असर वीरेन पर हो गया और उसको अपने किये पर पछतावा था। अब उसने कसम खा ली थी कि जिस दिन तक माँ ज़िंदा है मैं मधु के साथ उनकी सेवा करूंगा। यही मेरा पश्चाताप होगा और सही मायने में दान का सही पूण्य होगा और पापा के लिए सच्ची श्रद्धांजलि वाला श्राद्ध होगा।

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