स्कूल प्रशासन व विक्रेताओं की मनमर्जी तथा अभद्रता को आखिर क्यों झेलना पड़ रहा है अभिभावकों को?

देश में आज कल निजी स्कूलों की लुट का मंजर दिन ब दिन बड़ता ही जा रहा है। लेकिन उत्तराखंड में निजी स्कूलों की मनमानी और बुक-यूनिफॉर्म सेलरों की लूट का धंधा रुकने का नाम नहीं ले रहा है। हर साल स्कूल प्रशासन एक ही कक्षा की किताबें बदल देता है जिससे बच्चों को किसी भी हाल में हर साल नई किताब लेनी पड़े और ऐसा ही करते हैं यह बच्चों की यूनिफार्म के साथ हर साल यूनिफार्म नई लेनी पड़े इसके लिए इनको जो करना हो करते हैं। हमने देखा है कई जगह पर स्कूल प्रशासन यूनिफार्म में हर साल छोटे-मोटे बदलाव कर देते हैं जिससे अभिभावकों को मज़बूरी में बच्चों के लिए नई यूनिफार्म लेनी पड़े और स्कूल प्रशासन की जेब गर्म होती रहे।

यूनिफार्म और किताबों के रेट भी स्कूल प्रशासन अपनी मर्जी से ऐसे रखते हैं जैसे अभिभावक इनके दुश्मन हों। और अगर आप स्कूल प्रशासन की मर्जी से अपनी जेब ढीली नहीं करते हैं तो आपके बच्चे को कब स्कूल से बहार का रास्ता दिखा दिया जाये कुछ पता नहीं। निजी स्कूलों और इनकी दुकानों की इस मनमानी से हर अभिभावक परेशान है, और ये पहला मामला नहीं है जब ऐसा हुआ हो इससे पहले भी देहरादून समेत कई जिलों में ऐसी मनमानी सामने आ चुकी है। कई बार अभिभावकों ने धरना भी दिया लेकिन कोई हल नहीं निकला।

अभिभावक अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहता है लेकिन किसी भी सरकारी स्कूल में यह संभव नहीं है। आखिर होगा भी कैसे जब सरकार और सरकारी प्रशासन ही इसमें कोई रूचि नहीं लेता है। जितनी मर्जी आप किसी भी स्कूल की शिकायत कर दीजिये किसी के कान में जूं तक नहीं रेंगेगी। आखिर सबका अपना-अपना कमिसन उनके पास टाइम से जो पहुँच जाता है। बहुत से तो राज नेताओं ने ही अपने स्कूल-कॉलेज खोल रखे हैं अब अगर वह सरकारी स्कूल को अच्छा बना देंगे तो उनके महंगे स्कूल-कॉलेजों में कौन दाखिला लेगा। यह भी एक बहुत बड़ा कारण है सरकारी स्कूल के बदहाल होने का।

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निजी स्कूलों के विरोध में अगर कभी अभिभावक आवाज उठाता भी है तो उसको पता है कि इसके बाद उनका बच्चा उस स्कूल से निकल दिया जायेगा और ऐसे में वह सरकारी स्कूल में भी अपने बच्चे को पढ़ने के लिए नहीं भेज सकता क्योंकि सरकारी स्कूलों का स्तर राज्य सरकार और शिक्षा विभाग ने पहले ही बहुत ख़राब कर के रखा हुआ है। ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजने में मजबूर हैं। हर साल अभिभावकों की जेब में डाका डाला जा रहा है महंगी बुक और नई-नई यूनिफॉर्म के नाम पर और अगर अभिभावक इसका विरोध करता है तो उनके साथ अभद्रता की जाती है।

जी हां ऐसा ही मामला कोटद्वार के सिद्धबली से सामने आया है जहां एक यूनिफॉर्म सेलर ने अभिभावक के साथ अभद्रता की और दुकान से धक्का देकर बाहर निकाल दिया साथ ही यूनिफॉर्म देने से भी इंकार कर दिया। इस मामले ने इतना तुल पकड़ा है कि जनप्रतिनिधियों के साथ कान्वेंट स्कूल के अभिभावकों ने कोटद्वार तहसील में प्रदर्शन किया। बताया कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय को भी इस बाबत ज्ञापन भेजा गया है। अभिभावकों ने आज पहले स्कूल ड्रेस विक्रेता की दुकान के सामने प्रदर्शन किया। उसके बाद दुकान में घुस कर खरी खोटी सुनाई। आक्रोशित लोगों ने दुकानदार को बाहर निकालकर पीटने का प्रयास किया। एक घंटे के हंगामे के बाद पहुंची पुलिस ने दुकानदार को बचाया। पार्षदों ने दुकानदार के खिलाफ कोतवाली में तहरीर दी है। पुलिस घटना की जांच में जुट गई है।

अभिभावकों की ओर से संबंधित विद्यालय प्रशासन, शिक्षा विभाग और पुलिस प्रशासन से आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल ड्रेस विक्रेता मनमाना दाम वसूलता है। विरोध करने पर वह इससे पहले भी कई लोगों के साथ अभद्रता कर चुका है।

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