रोशन रतूड़ी की वजह से 7 साल बाद अपनी माँ से मिले फ़िलीपींस के रैनवोय

अंतरराष्ट्रीय समाजसेवी रोशन रतूड़ी किसी पहचान के मोहताज नहीं है। पूरी दुनिया में वह देवदूत नाम से प्रसिद्ध हैं। जब भी कोई मुसीबत में होता है तो वह रोशन रतूड़ी को याद करता है और रोशन रतूड़ी भी जितनी जल्दी हो सके उसकी मदद को पहुंच जाते हैं। अब तक 1500  से ज्यादा ज्यादा लोगों की मदद करने वाले रोशन रतूड़ी निस्वार्थ भाव से दुनियाभर के होटलियर भाई बहनों की मदद करने में लगे हैं। इसमें हिंदुस्तान के ही नहीं तमाम विदेशी मुल्कों के लोग शामिल हैं जो किसी न किसी कारण विदेशी धरती पर फंस जाते हैं। फ़िलीपींस के रैनवोय भी इन्ही में से एक है। अपने वतन वापस जाने की उम्मीद छोड़ चुके रैनवोय के लिए रोशन रतूड़ी देवदूत बनकर सामने आए। ना सिर्फ गंभीर बीमारी से जूझ रहे रैनवोय का इलाज कराया आज उन्हें उनके वतन भी भेज दिया। रोशन रतूड़ी लिखते हैं आज मेरे साथ जो इंसान खड़ा है, इसका नाम रैनवोय है, जो टीवी का मरीज़ था और इसकी कम्पनी के मालिक की वजह से यह 7 साल से अपने वतन नहीं जा सका और बीच मैं इसकी तबियत बहुत ख़राब हो गयी थी, बाद मैं जब किसी ने इसको मेरे पास भेजा तो मैंने इसकी सारी दुख भरी बातें सुनी और सुनकर बहुत दुख हुआ, 27 दिन तक इसको होसपिटल मैं भी रखा है, ये फ़िलीपींस देश का रहने वाला है। किसी की मदद करने के लिये खून के रिश्तों का होना जररूरी नहीं है, बस नीयत साफ़ होनी चाहिए । इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म-मजहब नहीं है । फिर मैंने इसका पासपोर्ट व आउट पास व सभी क़ानूनी काग़ज़ पूरे किये और पिछले 11 महीने से इसको होसपिटल से दवाइयाँ भी दिलवाई और अब यह पुरी तरह से ठीक होकर, सात साल बाद अपने बूढ़ी माँ से मिलने जा रहा है । इसकी बूढ़ी माँ ह्रदय रोग की मरीज़ है, अपने बेटे का इंतज़ार कर रही है, इसके पिता नहीं है ।

हमारी भारतीय संस्कृति हमेशा युगों से हम भारतीयों को यही सिंखाती आई है कि ,दुसरो की मदद करनी चाहिए, और हमें अपने देश का नाम अच्छाइयों मैं इंसानियत मैं और आगे बढाना चाहिए । मुझे गर्व है कि मैं भारतीय हूँ, और मुझे विदेशी धरती मैं तकलीफों मैं फंसे लोगों की सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त हूआ, बहुत ख़ुश हूँ कि एक बेटे को उसकी माँ से मिलाने जा रहा हूँ । अगर जूनून हो जज़्बा हो तो मुश्किल काम को भी आसानी से किया जा सकता है ।

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