उत्तराखंड: 15 गुलदारों पर लगाए जाएंगे रेडियो कॉलर, जानें क्या है इसके पीछे की वजह

उत्तराखंड के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन जेएस सुहाग का मानना है कि अगले 7 से आठ महीने में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लिए जाने वाले सभी 15 लेपर्ड को कॉलर कर लिया जाएगा।

देहरादून। देश में मैन एनिमल कॉन्फ्लिक्ट और खासकर लेपर्ड के हमलों के लिए उत्तराखंड सबसे टॉप राज्यों में से एक है। यहां अन्य जंगली जानवरों के साथ ही सबसे अधिक लोग लेपर्ड के हमले में मारे जाते हैं। राजधानी देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश से लगा राजाजी टाइगर रिजर्व मोतीचूर रेंज का रायवाला का क्षेत्र तो इसके लिए देश में  हॉटस्पॉट के रूप में जाना जाता है। पिछले पांच सालों में रायवाला के करीब दस किलोमीटर एरिया में गुलदार 26 से अधिक लोगों को मार चुका है। इस क्षेत्र में करीब दो दर्जन गुलदार हैं, जिनकी मौजूदगी कैमरे ट्रैप में सामने आई है। अब इसी क्षेत्र में पांच गुलदारों को सबसे पहले कॉलर किया जाएगा। इसके बाद राजाजी पार्क से लगे हरिद्वार फॉरेस्ट डिवीजन और देहरादून फॉरेस्ट डिवीजन से भी पांच-पांच लेपर्ड को कॉलर करने की योजना है।

इसमें भारतीय वन्य जीव संस्थान के वैज्ञानिक भी शामिल होंगे। संस्थान के डायरेक्टर धनञ्जय मोहन का कहना है कि इससे मैन एनिमल कन्फिलक्ट को कम करने में मदद मिलेगी। रेडियो कॉलर लगने से  रेजीडेंसियल एरिया में आने के आदि हो चुके इन गुलदारों की पल-पल की लोकेशन मिलती रहेगी। इससे गुलदार के आने-जाने का रास्ता मालूम हो सकेगा। साथ ही ये भी जानकारी मिल पाएगी कि गुलदार किस समय जंगल छोड़ रेजीडेंसियल एरिया की ओर मूव करते हैं। क्या गुलदारों के व्यवहार में कोई चेंज आ रहा है। इससे इस बात का भी अध्ययन किया जा सकेगा।

15 लेपर्ड को कॉलर कर लिया जाएगा
उत्तराखंड के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन जेएस सुहाग का मानना है कि अगले 7 से आठ महीने में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लिए जाने वाले सभी 15 लेपर्ड को कॉलर कर लिया जाएगा। बता दें कि देश भर में अलग -अलग समय पर गुलदार कॉलर किए जाते रहे हैं। लेकिन, एक साथ 15 गुलदार को रेडियो कॉलर पहली बार किया जा रहा है। दरअसल, जर्मन फंडिग एजेंसी जीआईजेड के सहयोग से मैन एनिमल कॉन्फ्लिक्ट को कम करने के लिए 2017-18 में देश के तीन राज्यो वेस्ट बंगाल, कर्नाटक औऱ उत्तराखंड  में ये प्रोजेक्ट लांच किया गया था। उत्तराखंड में चूंकि लेपर्ड के साथ सबसे अधिक कॉन्फ्लिक्ट होता है, लिहाजा यहां लेपर्ड पर काम हो रहा है।

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