नौकरी न मिलने पर सब्ज़ी-दूध की मार्केटिंग शुरु की पोस्ट ग्रेजुएट युवक ने

योगेश सिंह नेगी ने नौकरी की उम्मीद छोड़ सब्ज़ी और दुग्ध उत्पादन में ही अपना भविष्य मान लिया है।

अल्मोड़ा ज़िले में तेजी से प्रवासी गांवों में लौटकर स्वरोजगार करना शुरु कर रहे हैं। कुछ किसान तो ऐसे हैं जो खुद और अपने बच्चों को खेती और दुग्ध व्यवसाय में ही लगाकर लाखों कमा रहे है। बेमौसमी सब्ज़ी किसानों का मुख्य व्यवसाय है। दर्जनों गांवों में स्वरोजगार युवाओं ने शुरु किया। द्वाराहाट के दूनागिरी में कई परिवार सब्ज़ी और दूध के कारोबार से बेहतर लाभ कमा रहे हैं।

द्वाराहाट के दूनागिरी में भीम सिंह नेगी का परिवार पिछले कई कुछ सालों से सब्जी और दूध का व्यवसाय कर रहा है। ये लोग मटर, टमाटर, गोभी, मूली सहित सभी प्रकार की बेमौसमी सब्जी बिना पॉली हाउस के ही उत्पादन कर रहे हैं।

बेमौसमी जैविक सब्ज़ी का बाज़ार पहाड़ में सबसे अधिक है। लोग मैदान में भी पहाड़ की जैविक सब्जी की मांग कर रहे हैं। भीम सिंह नेगी ने न्यूज़ 18 को बताया कि साल भर में उन्हें 4 लाख से अधिक की बचत हो जाती है।

भीम सिंह नेगी का बेटे योगेश सिंह नेगी ने पोस्ट ग्रेजुऐशन तक पढ़ाई की और फिर मैदानी क्षेत्रों में नौकरी की तलाश में निकले। काफ़ी प्रयास के बाद भी नौकरी नहीं मिली तो वह थक-हार कर गांव लौट आए। इसके बाद योगेश ने पिता के साथ ही सब्जियों और दूध का काम करना शुरु किया।

वह सब्ज़ियों और दूध की मार्केटिंग करने लगे। उनके भी जुड़ने से परिवार का मुनाफ़ा बढ़ा। अब योगेश सिंह नेगी ने नौकरी की उम्मीद छोड़ दी है सब्ज़ी और दुग्ध उत्पादन में ही अपना भविष्य मान लिया है। दूनागिरी क्षेत्र के नेगी परिवार को देखकर अब अन्य किसानों ने भी सब्ज़ी उत्पादन को ही मुख्य व्यवसाय करने की योजना बना ली है।

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