…तो वापस लिए जाएंगे PM-किसान सम्मान निधि स्कीम के 6000 रुपये, सरकार के खाते में ऐसे होगा जमा!

नई दिल्ली। उत्तर से दक्षिण भारत तक पीएम किसान सम्मान निधि स्कीम में भ्रष्टाचार जारी है। चाहे वो तमिलनाडु हो या यूपी का बाराबंकी और मिर्जापुर। भ्रष्टचारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी किसान योजना को भी नहीं छोड़ा। हालांकि, जगह-जगह से आ रही गड़बड़ियों की खबरों के बीच सरकार भी सख्त हो गई है। जिन लोगों ने गलत तरीके से पैसा ले लिया है उन्हें वह रकम वापस करने को कहा जाएगा। ऐसा नहीं किया तो सरकारी पैसे की रिकवरी के लिए कृषि विभाग एफआईआर दर्ज करवाएगा।

बीते सितंबर महीने में ही पता चला कि यूपी के बाराबंकी जिले में प्रधानमंत्री  किसान सम्मान निधि में बड़ा घोटाला हुआ है। ढाई लाख अपात्रों को पैसा मिल गया है। प्रशासन ने धनराशि वापसी का अभियान शुरू किया है। सितंबर में ही गाजीपुर में इसी तरह का मामला सामने आया। बताया गया है कि यहां भी 1.5 लाख फर्जी किसानों के नाम डिलीट किए गए हैं। वेरीफिकेशन करवाकर अपात्रों से रिकवरी की कोशिश जारी है। तमिलनाडु में तो इस स्कीम में घोटाले को लेकर देश की सबसे बड़ी कार्रवाई हुई है। सूत्रों के मुताबिक 96 कांट्रैक्ट कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं हैं। 34 अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। 13 जिलों में एफआईआर दर्ज करके 52 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

पीएम किसान सम्मान निधि के तहत सरकार साल भर में 6000 रुपये देती है

ऐसे में यह तय मानिए कि अगर आपने गलत तरीके से लाभ लिया है तो किसी भी सूरत में उसे सरकारी खजाने में वापस करना ही होगा। कोई उस पैसे को पचा नहीं सकता। केंद्रीय कृषि मंत्रालय पहले ही राज्यों को पत्र लिखकर कह चुका है कि अगर अपात्र को पैसे मिलने की सूचना मिलती है तो उनका पैसा कैसे वापस होगा। ऐसे लोगों को पैसा डीबीटी (Direct Benefit Transfer) से गया है और डीबीटी से ही वापस लिया जाएगा।

कैसे वापस होगा पैसा

सूत्रों का कहना है कि ऐसे लाभार्थी अपने बैंक को ट्रांजैक्शन वापस करने की अर्जी दें। बैंक इस पैसे को अलग अकाउंट में डाले और सरकार को वापस करे। राज्य सरकारें लाभार्थियों को पैसे रिफंड करने में मदद करें। राज्य अपात्रों से पैसे वापस लेकर https://bharatkosh।gov।in/ में जमा कराएं।

कौन नहीं है योजना का हकदार

  • अगर कोई किसान खेती करता है लेकिन वह खेत उसके नाम न होकर उसके पिता या दादा के नाम हो तो उसे 6000 रुपये सालाना का लाभ नहीं मिलेगा। वह जमीन किसान के नाम होनी चाहिए।
  • अगर कोई किसान किसी दूसरे किसान से जमीन लेकर किराए पर खेती करता है, तो भी उसे भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा। पीएम किसान में लैंड की ओनरशिप जरूरी है।
  • सभी संस्थागत भूमि धारक भी इस योजना के दायरे में नहीं आएंगे।
  • अगर कोई किसान या परिवार में कोई संवैधानिक पद पर है तो उसे लाभ नहीं मिलेगा।
  • राज्य/केंद्र सरकार के साथ-साथ पीएसयू और सरकारी स्वायत्त निकायों के सेवारत या सेवानिवृत्त अधिकारी और कर्मचारी होने पर भी योजना के लाभ के दायरे में नहीं आएंगे। हालांकि, मल्टी टास्किंग स्टाफ/चतुर्थ श्रेणी/समूह डी कर्मचारियों को रियायत है।
  • डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, आर्किटेक्ट्स और वकील जैसे प्रोफेशनल्स को भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा, भले ही वह किसानी भी करते हों।
  • 10,000 रुपये से अधिक की मासिक पेंशन पाने वाले सेवानिवृत्त पेंशनभोगियों को इसका लाभ नहीं मिलेगा।
  • अंतिम मूल्यांकन वर्ष में इनकम टैक्स का भुगतान करने वाले पेशेवरों को भी योजना के दायरे से बाहर रखा गया है।

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