उत्तराखंडः विधानसभा सत्र की तैयारी पूरी, विपक्ष ने बनाई सत्तापक्ष को घेरने की रणनीति

देहरादून। 23 सितम्बर को होने वाला उत्तराखंड विधानसभा का एक दिवसीय सत्र हंगामेदार होने वाला है। विपक्ष एक दिन के सत्र को लेकर सत्ता पक्ष पर सवाल खड़े कर रहा है कि सरकार जनता के सवालों का जवाब देने से बच रही है। इसलिए उसने कोविड की आड़ में सत्र की अवधि जितनी कम कर सकती थी, उतनी कर दी। इस बीच विधानसभा सचिवालय ने विधायकों के सदन में बैठने के इंतज़ाम कर दिए हैं लेकिन अभी तक 3 विधायकों ने ही इस पर सहमति दी है।

यह है सिटिंग अरेंजमेंट

विधानसभा सचिवालय ने 23 सितंबर को आहूत एक दिनी विधानसभा सेशन को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। 70 विधायकों वाले विधानसभा मंडप में केवल 30 विधायक बैठेंगे। 10 विधायक पत्रकार दीर्घा में और 30 विधायक विधानसभा के कमरा नंबर 107 में बैठेंगे। ये 30 विधायक सदन से वर्चुअली कनेक्ट होंगे।

विधानसभा सेशन से विधायकों के वर्चुअल कनेक्ट होने के लिए विधानसभा सचिवालय भले ही कड़ी मशक्कत कर रहा हो लेकिन विधायकों की इसमें कोई रुचि नहीं है। यही कारण है कि विधानसभा द्वारा एडवाइजरी जारी करने के बाद केवल 3 विधायकों चंदन राम दास, नवीन दुमका और संजीव आर्य ने ही वर्चुअली कनेक्ट होने के लिए अपनी सहमति दी है।

कांग्रेस के सिर्फ़ 7 विधायक

23 सितम्बर से शुरू होने वाले विधानसभा सेशन में कांग्रेस के करीब 7 विधायक ही सदन में नजर आएंगे। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा ह्रदयेश, विधायक हरीश धामी कोरोना पॉजिटिव हैं तो विधायक राजकुमार, काज़ी निज़ामुद्दीन, फुरकान अहमद की तबियत खराब है। सोमवार को आयोजित कांग्रेस विधान मण्डल दल की मीटिंग में भी उपनेता प्रतिपक्ष करन माहरा, विधायक मनोज रावत, गोविंद सिंह कुंजवाल, ममता राकेश ही मौजूद रहे।

कांग्रेस विधानमंडल दल की मीटिंग में बेरोज़गारी, कोविड के संक्रमण के बीच स्वास्थ सेवाओं की लचर स्थिति, विधायक महेश नेगी यौन शोषण मामले पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई गई। विपक्ष का कहना है कि सरकार कोविड काल में चरम पर पहुंच चुकी बेरोजगारी लगाम लगाने में सरकार नाकाम साबित हुई है। तय किया गया कि इन मुद्दों पर नियम-58 के तहत काम रोको प्रस्ताव लाकर चर्चा की मांग की जाएगी।

विधानसभा अध्यक्ष की गैर मौजूदगी में कामकाज देखने वाले  डिप्टी स्पीकर रघुनाथ सिंह चौहान ने कहा कि कार्यमंत्रणा समिति की मीटिंग में ये स्पष्ट तौर पर बता दिया गया है कि सरकार नियम-58 के तहत लाए जाने वाले विपक्ष के मुद्दों का केवल लिखित में जवाब उपलब्ध कराएगी। इस पर चर्चा नहीं होगी।

जवाबदेही से बच रही है सरकार

उप नेता प्रतिपक्ष करन माहरा का कहना है कि सरकार कोविड की आड़ में अपनी जवाबदेही से बच रही है। भाजपा हो या सरकार अपने तमाम कार्यक्रम कर रही है जिसमें बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं। फिर सत्र को लेकर इतनी सतर्कता क्यों और वह भी तब जब सोशल डिस्टेंसिग से लेकर सावधानी के तमाम उपाय किए गए हों।

निर्दलीय विधायक प्रीतम सिंह का कहना है कि जनता की तमाम समस्याएं होती हैं जिनका सरकार को जवाब देना होता है। सदन के माध्यम से उनका निस्तारण किया जाता है। एक दिन के सदन में कोई क्या समस्या रखेगा, वह भी तब जब प्रश्नकाल नहीं होगा।

सूत्रों के मुताबिक यदि स्पीकर ने चर्चा की मांग स्वीकार नहीं की तो विपक्ष सदन का वॉकआउट कर विधानसभा के बाहर धरना भी दे सकता है।

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