हिन्दू राष्ट्र से नहीं, जातिवाद से खतरा

कई बार राजनीति में नेता कहते कुछ हैं और उसका अर्थ कुछ और होता है। शशि थरूर ने बयान दिया है कि अगर भाजपा 2019 में सत्ता में आती है तो भारत हिन्दू-पाकिस्तान बन जायेगा। हिन्दू तालिबान है। वास्तव में वो कहने की कोशिश कर रहे थे कि अगर भाजपा सत्ता में आती है तो भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित कर सकती है। समस्या यह है कि इस जुमले का किसी पर कोई असर नहीं होता। भाजपा नेता खुद ही कहते हैं कि वो भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहते हैं, फिर भला ऐसे किसी बयान पर ऐसा भूचाल नहीं आ सकता था जैसा उनके हिन्दू-पाकिस्तान वाले बयान पर आया है इसलिये उन्होंने हिन्दू-पाकिस्तान बनने की बात की ताकि उनके बयान से हिन्दुओं के आतंकवाद से जुड़ने का संकेत दिया जा सके।
वास्तव में हमारे देश में धर्मनिरपेक्षता के नाम पर तुष्टिकरण की राजनीति हावी रही है और हिन्दू राष्ट्र का हौवा भी ऐसे ही तथाकथित सेकुलरों द्वारा खड़ा किया गया है। पूरा देश इस बात को जानता है कि हमारा देश हिन्दू राष्ट्र है जहाँ किसी के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता लेकिन तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले राजनीतिक दल जबरदस्ती देश को धर्मनिरपेक्षता के नाम पर भटकाने की कोशिश करते हैं। देश को धर्मनिरपेक्षता के नाम पर भटका कर गलत रास्ते पर डाला गया है। वास्तव में हिन्दू समाज की समस्या सांप्रदायिकता नहीं है बल्कि जातिवाद है। हिन्दू जन्म से जातिवादी होता है और सारी जिन्दगी इसी जातिवाद में गुजार देता है और इसी प्रकार मुस्लिम जन्म से सांप्रदायिक होता है और सारी जिन्दगी ऐसे ही रहता है। धर्मनिरपेक्षता के पुजारियों ने सांप्रदायिकता का हल्ला मचाकर देश की वास्तविक समस्या जातिवाद से ध्यान भटकाया है। यही कारण है हमारे देश में जातिवादी दलों की भरमार है और वे खुलेआम सांप्रदायिकता का डर दिखाकर जातिवादी राजनीति करते हैं।
आधुनिक भारत में जातिवाद जारी है लेकिन हिन्दू समाज इसे एक बुराई के रूप में स्वीकार करता है और इसके खिलाफ संघर्ष भी चल रहा है। शहरीकरण ने इस पर रोकथाम लगाने का काम किया है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रा में सुधार की गति बहुत मन्द है। घूंघट प्रथा हिन्दू समाज में है लेकिन यह अब धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है जबकि मुस्लिम समाज में बुरके का प्रयोग बढ़ रहा है क्योंकि हिन्दू समाज घूंघट को एक बुराई के रूप में देखता है और मुस्लिम समाज इसे अपनी धार्मिक आस्था से जोड़कर देखता है। इसी प्रकार तीन तलाक, बहुविवाह, हलाला और अन्य कितनी ही सामाजिक बुराइयों को मुस्लिम समाज धर्म के चोले में छिपाकर बचाने की जुगत लगाता रहता है।

ऐसी सामाजिक बुराइयों को भारतीय संविधान द्वारा हिन्दू समाज से खत्म कर दिया गया है और बाबा साहब चाहते थे कि मुस्लिम समाज भी इन बुराइयों के खिलाफ बने कानून के अन्तर्गत आये और मुस्लिम महिलाओं को भी वही अधिकार मिलें जो हिन्दू महिलाओं मिले हुए हैं लेकिन मुस्लिम समाज धार्मिक आस्था के नाम पर इन बुराइयों को न केवल अभी तक ढो रहा है बल्कि इन्हें खत्म करने की कोशिश के खिलाफ पूरा जोर लगा रहा है। सच्चर कमेटी कहती है कि मुस्लिम समाज की हालत दलितों से भी ज्यादा खराब है लेकिन कोई भी मुस्लिम समाज को यह नहीं बता रहा है कि उनकी ऐसी हालत के जिम्मेदार वो खुद ही हैं। सामाजिक बुराइयों को धार्मिक चोला पहनाने से मुस्लिम समाज अलग-थलग हो गया है। यह एक विडम्बना ही है कि जिन सामाजिक बुराइयों को शरीयत पर चलने वाले मुस्लिम राष्ट्र भी छोड़ चुके हैं उनको भी भारतीय मुस्लिम समाज ने धार्मिक आस्था के नाम पर बचाया हुआ है।
तथाकथित सेकुलर जमात ने देश की वास्तविक समस्या जातिवाद को कभी महत्त्व नहीं दिया क्योंकि जातिवाद ही उनकी रोजी-रोटी का साधन था। भाजपा अपनी राजनीति चमकाने के लिये जानबूझकर हिन्दू राष्ट्र का राग अलापती है और विपक्ष अनजाने में ही विरोध पर उतर आता है जबकि हिन्दू राष्ट्र का मुद्दा भारतीय राजनीति में कोई महत्त्व नहीं रखता है। हिन्दू राष्ट्र के विरोध ने ही भाजपा को एक अलग पहचान दी है और इसी पहचान के कारण आज भाजपा सबसे ताकतवर राजनीतिक दल के रूप में पूरे विपक्ष के लिये चुनौती बन चुकी है और ये चुनौती इतनी जबरदस्त हो चुकी है कि 60 साल तक शासन करने वाली सबसे प्राचीन और बड़ी पार्टी अपने अस्तित्व के लिये संघर्ष कर रही है।
जो राष्ट्र अघोषित रूप से हिन्दू राष्ट्र है उसे हिन्दू राष्ट्र घोषित करने से कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है लेकिन हिन्दू राष्ट्र की राजनीति से देश को बहुत फर्क पड़ता है। आज हम जो हिन्दू-मुस्लिम का विवाद देख रहे हैं ये हिन्दू राष्ट्र के नाम पर की जा रही राजनीति के कारण ही है। मुस्लिमों को बेवजह डराया जा रहा है जबकि सबसे ज्यादा वो मुस्लिम देशों में ही मारे जा रहे हैं। पश्चिमी देशों में मुस्लिम सुरक्षित हैं और भारत में भी लेकिन पाकिस्तान में घर से निकला मुस्लिम नहीं जानता कि वो वापिस शाम को घर पहुँचेगा या नहीं। अरब देशों में कई देश मरण शैय्या पर लेटे हुए हैं।
सारी दुनिया का मुसलमान जानता है कि वो गैर-मुस्लिम देशों में ही सुरक्षित हैं न कि किसी मुस्लिम देश में और यही कारण है कि अपने देश में असुरक्षित महसूस करने पर वो गैर-मुस्लिम देशों से शरण माँगता है। इसका दूसरा कारण यह भी है कि मुस्लिम देश ही पीड़ित मुस्लिमों को शरण नहीं देते हैं। हिन्दू बहुल होने के कारण मुस्लिम भारत में सुरक्षित हंै जबकि हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान में तो मुस्लिम मुस्लिमों के हाथों ही मारे जा रहे हैं। भीड़ द्वारा भारत में मारे गये लोग जाति-धर्म के कारण नहीं बल्कि कानून-व्यवस्था की कमजोरी और अफवाहों के कारण मारे जा रहे हैं।
ऐसी घटनाओं को रोकने के लिये कानून-व्यवस्था सुधारने और अफवाहों को फैलने से रोकने की जरूरत है। गोहत्या पर प्रतिबन्ध होने के बावजूद पुलिस इसे रोक नहीं पाई है इसलिये गो-तस्कर का इल्जाम लगाकर कुछ लोग भीड़ द्वारा मुस्लिमों की हत्या करवा रहे हैं। यह इस देश पर कलंक हैं क्योंकि अल्पसंख्यकों की हत्या हमारी संस्कृति नहीं है। यह मुद्दा इसलिये भी गम्भीर है क्योंकि इससे हमारे देश की बहुत बदनामी हो रही है।
राष्ट्रहित के लिये जरूरी हो गया है कि हिन्दू-मुस्लिम के झगड़े को छोड़कर देश जातिवाद के खिलाफ जंग छेड़े क्योंकि यही एक ऐसी समस्या है जो वास्तव में देश को हिन्दू-पाकिस्तान बना सकती है। इस देश को सबसे बड़ा खतरा जातिवाद से है और अगर इस समस्या का समाधान सही तरीके से नहीं किया गया तो हिन्दू ही हिन्दू का दुश्मन बन जायेगा और वही होगा जो मुस्लिम देशों में हो रहा है लेकिन भारतीय राजनीति उल्टी दिशा में जा रही है। हर राजनीतिक दल जातिवाद के जहर को फैलाने का काम कर रहा है। यह ठीक है कि कुछ चुनाव क्षेत्रों में धर्म की राजनीति असर रखती है लेकिन जातिवाद से पूरे देश की राजनीति चलती है। मेरा स्पष्ट रूप से मानना है कि हमें जातिवाद के खिलाफ खड़ा होना होगा और हिन्दू एकता की अलख जगानी होगी, तभी देश शान्तिपूर्वक विकास के रास्ते पर चलेगा। भारतीय मुस्लिमों को किसी से कोई खतरा नहीं है और न ही भारतीय मुस्लिम किसी के लिये खतरा हैं। जो भी हल्ला सुनाई दे रहा है, वो केवल राजनीति है, इसलिये हिन्दू राष्ट्र से भयभीत होने की जगह जातिवाद से लड़ने की जरूरत है।

-सीमा पासी-

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