जब मुश्किल में फंसे तो नेपाल को आई भारत की याद, भारत ने की पूरी मदद

सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय झूला पुल को खोलने के लिए नेपाल के प्रशासन से अनुरोध प्राप्त हुआ था। नेपाली प्रशासन का कहना था कि एक बच्ची की तबीयत ज्यादा खराब हो गई है।

पिथौरागढ़। नेपाल चाहे जितना भी विवाद खड़ा करता रहे पर भारत उसके साथ हमेशा दोस्ती का हाथ ही बढ़ना चाहता है। कुछ इसी तरह का ताजा मामला उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में भारत- नेपाल बॉर्ड पर सामने आया है। भारत ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए एक बीमार नेपाली बच्ची का इलाज कराने को लेकर भारत में आने के लिए अंतरराष्ट्रीय झूला पुल खोल दिया। खास बात यह है कि भारत ने 20 मिनटों के लिए यह अंतरराष्ट्रीय झूला पुल खोला था। इसके बाद परिजनों ने भारत में आकर अपनी बेटी का इलाज कराया।

जानकारी के मुताबिक, भारत से लगे नेपाल के मल्लिकार्जुन गांव की एक बच्ची का लंबे समय से दार्चुला के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। इसी बीच बच्ची की आंतों में गांठें बनने के कारण उसकी हालत नाजुक हो गई। उस बचना मुश्किल हो गया, क्योंकि नेपाल में आसपास के इलाके में इलाज का कोई साधन नहीं था। वहीं, भारत में अंतरराष्ट्रीय झूला पुल बंद था। ऐसे में परिजन बच्ची को लेकर भारत में इलाज कराने नहीं आ पा रहे थे।

इसी बीच नेपाल के समाजसेवियों के जरिये परिजनों ने पिथौरागढ़ जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई। फिर, भारतीय अफसरों ने मासूम की जिंदगी बचाने के लिए तुरंत झूला पुल खोलने के आदेश दे दिए। वहीं, बच्ची का इलाज हो जाने के बाद परिजनों ने भारतीय अफसरों को आभार जताते हुए कहा कि सच में भारत महान देश है। फिलहाल, प्राथमिक उपचार के बाद बीमार मासूम को धारचूला के बलुवाकोट में रखा गया है। आज बच्ची को बेहतर इलाज के लिए पिथौरागढ़ जिला अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा।

वहीं, सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय झूला पुल को खोलने के लिए नेपाल के प्रशासन से अनुरोध प्राप्त हुआ था। नेपाली प्रशासन का कहना था कि एक बच्ची की तबीयत ज्यादा खराब हो गई है। इलाज कराने के लिए कृपया पुल खोल दिया जाए। इसके बाद झुला पुल को 20 मिनट तक के लिए खोला गया। उन्होंने कहा कि पुल खुलने के बाद कई लोग चिकित्सा उपचार और रोजगार के लिए भारत में आए। साथ ही जो यहां फंस गए थे, वे नेपाल लौट गए।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, महज 20 मिनट के लिए झूला पुल को खोला गया था। इस दौरान दोनों देशों के 138 लोगों ने पुल से आवाजाही की। एसएसबी के इंस्पेक्टर कश्मीर सिंह ने बताया कि बीमार बच्ची को इलाज के लिए भारत लाया जाना था। इसके अलावा कई अन्य लोगों को भी भारत और नेपाल में आवाजाही करनी थी। ऐसे में मामले की गंभीरता को समझते हुए भारत और नेपाल प्रशासन के अधिकारियों के बीच बातचीत हुई। और उसके बाद दोनों देशों की सहमति से पुल को 20 मिनट के लिए खोल दिया गया।

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