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पहाड़ों की रानी मसूरी की सड़कों की बिगड़ी हालत, जगह- जगह बिखरा पड़ा मलबा, लोग परेशान
 

मसूरी। जिस पहाड़ों की रानी में प्रकृति के सौंदर्य का दीदार करने के लिए वर्षभर सैलानी आते हैं, उसके सौंदर्य को लेकर सरकारी तंत्र रत्ती भर संवेदनशील नहीं है। यहां सरकारी विभागों की असंवेदशीलता जर्जर सड़कों तक ही सीमित नहीं है। इसे मैसानिक लाज बस स्टैंड से लेकर लाइब्रेरी बस-टैक्सी स्टैंड और इंदिरा भवन के समीप सड़क पर पसरे मलबे के रूप में भी देखा जा सकता है, जो यहां कई माह पहले अतिक्रमण हटाने के दौरान जमा हुआ था।

बना रहता है दुर्घटना होने का भय

यह हाल तब है, जब इस क्षेत्र में पूरे साल यातायात का भारी दबाव रहता है और सड़कें भी ज्यादा चौड़ी नहीं हैं। इतना ही नहीं, यहां सड़क किनारे बनी नालियों के ऊपर जाली तक नहीं लगाई गई हैं। इससे दुर्घटना होने का भय भी बना रहता है। सड़क किनारे पड़ा मलबा इन नालियों में जाकर पानी की निकासी को भी बाधित कर रहा है।

मसूरी में इसी वर्ष मई में प्रशासन, एमडीडीए, लोनिवि, एनएच और नगर पालिका परिषद की संयुक्त टीम ने अतिक्रमण के विरुद्ध अभियान चलाया था। इस दौरान तमाम अवैध खोखों और पक्के निमार्णों को जेसीबी से तोड़ा गया था। लेकिन, सरकारी तंत्र ने अधिकांश जगह अतिक्रमण को तोड़कर ही कार्रवाई की इतिश्री कर ली, उसका मलबा नहीं हटाया गया। इस कड़ी में मैसानिक लाज बस स्टैंड, लाइब्रेरी बस-टैक्सी स्टैंड और इंदिरा भवन के समीप बने सार्वजनिक प्याऊ भी तोड़े गए, क्योंकि ये अतिक्रमण कर बनाए गए थे।

सरकारी तंत्र को सैलानियों की सहूलियत की रत्ती भर फिक्र नहीं

इन सार्वजनिक प्याऊ का मलबा तब से सड़क पर ही पसरा हुआ है। जो न सिर्फ यातायात में व्यवधान उत्पन्न कर रहा है, बल्कि राहगीर इसके कारण चोटिल भी हो रहे हैं। बावजूद इसके सरकारी तंत्र इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा। इससे साफ है कि सरकारी तंत्र को सैलानियों और शहरवासियों की सहूलियत की रत्ती भर फिक्र नहीं है। ऐसे में टैक्सी आपरेटर और क्षेत्रीय व्यवसायी पूछ रहे हैं कि आखिर यह मलबा कौन हटाएगा, नगर पालिका, एनएच या लोनिवि।

नाली पर जाली नहीं, दुर्घटना का खतरा

मैसानिक लाज बस स्टैंड, लाइब्रेरी बस-टैक्सी स्टैंड और इंदिरा भवन के अलावा भी शहर के तमाम हिस्सों में नाली पर जाली नहीं लगाई गई हैं। सड़कें संकरी होने से इन नालियों के कारण दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है। क्षेत्रीय व्यवसायी और निवासी लगातार इन नालियों पर जाली लगाने की मांग कर रहे हैं, मगर सरकारी तंत्र उदासीन बना हुआ है।