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सुलगता सवाल :- रिटायरमेंट के बाद भी स्वास्थ्य विभाग में आईईसी हेड की कुर्सी का मोह क्यों नहीं छोड़ पा रहे हैं जेसी पांडे..?
कड़क मिजाज स्वास्थ्य मंत्री को भी जेसी पांडे की नियुक्ति के लिए अधिकारियों ने कर दिया गुमराह
 

-रिटायर होने के बाद आईईसी में फिर से 11 महीने के लिए नियुक्ति के आदेश

- आईईसी में भ्रष्टाचार की PMO ने दिए हैं जांच के आदेश

-कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

कड़क मिजाज स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत के होते हुए भी स्वास्थ्य विभाग में अजब-गजब हो रहा है। शासन की अपर सचिव गरिमा रौंकली ने 20 जुलाई को डीजी हेल्थ को एक पत्र लिखकर सूचना दी है कि आईईसी अधिकारी के पद पर जेसी पांडे को आउटसोर्सिंग के माध्यम से 11 माह के लिए तैनाती दी गयी है। उनको पहले सेवा विस्तार दिया जा रहा था लेकिन सोशल मीडिया में जानकारों ने मुद्दा उठाया तो फाइल अटक गयी। स्वास्थ्य मंत्री डा. धन सिंह रावत ने तब कहा था कि क्या पांडे को नेशनल अवार्ड मिला है, जो उन्हें सेवा विस्तार दिया जाएं।

कांग्रेस ने पूरे मामले को मुद्दा बनाकर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार चहेते अधिकारियों का मोह नहीं छोड़ पा रही है और रिटायरमेंट के बाद भी उन्हें मलाईदार पदों पर दोबारा नियुक्ति दे रही है। विपक्ष इस मामले को लेकर सोशल मीडिया के साथ ही, सड़क पर भी हल्ला बोल की तैयारी में जुट गया है।

इस पूरे प्रकरण पर सूत्रों के मुताबिक जब स्वास्थ्य मंत्री से इनकार हो गया तो जेसी पांडे ने बड़ा जुगाड़ भिड़ाया और फिर 11 महीने की नौकरी और हासिल करने में सफल हो गये।
मजेदार बात है कि जेसी पांडे के मामले में डीजी हेल्थ शैलजा भट्ट ने दो पत्र जारी किये हैं। एक पत्र उन्होंने आईईसी के सहायक निदेशक को 22 जुलाई 2022 को लिखा कि स्वास्थ्य महानिदेशालय में मुद्रण स्टेशनरी और आईईसी सामग्री की अनियमितताओं की जांच की जाए। इस मामले में कोटद्वार के जगमोहन सिंह गुसाईं ने पीएमओ में शिकायत की थी। तब जेसी पांडे ही आईईसी के हेड थे।

उधर, डीजी का दूसरा पत्र शासन के आदेश को लेकर है कि जेसी पांडे आईईसी अधिकारी के रिक्त पद पर तैनात किया जाए। यह गजब हाल है। सबसे अहम बात यह है कि विभाग में कार्यरत कई लोग इस काबिल हैं कि वह आईईसी का कार्य कर सकें। इसके बावजूद जेसी पांडे की आउटसोर्सिंग के माध्यम से तैनाती और अन्य कर्मचारी उनके अधीन काम करेंगे यह समझ से परे है।

इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री डा. धन सिंह रावत से जब पत्रकारों ने सवाल किया तो उनका कहना कि यह मामला पूर्व में उनके संज्ञान में नहीं था उनके संज्ञान में हाल ही में मामला आया है । जिसको लेकर उन्होंने स्वास्थ्य महानिदेशक को जांच के आदेश दे दिए हैं। डीजी जल्द ही जांच प्रेषित करेंगी। जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री ने पूरे मामले की गम्भीरता के साथ जांच कराने के साथ ही जल्द जांच रिपोर्ट देने को कहा है।